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संजीवनी टुडे एक्सक्लूसिव : नरेंद्र मोदी, कालाधन और दोनों का अब तक का सफर !
sanjeevnitoday.com | Wednesday, November 30, 2016 | 08:30:51 PM
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नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी ने अपने  चुनाव अभियान के दौरान कालाधन वापस लाकर,प्रत्येक देशवासी के खाते मे 15-15 लाख रुपया जमा करने का वादा भी किया चुनाव  के वाद विपक्षियों ने उन्हें जुमलेबाजी करने के आरोप लगाए  उन्होंने  भारत सरकार ने 8 नवम्बर को नोटबंदी का ऐलान किया, जिसे  कालेधन को खत्म करने के लिए किया गया सबसे ऐतिहासिक फैसला बताया जा रहा है। नोटबंदी को किस तरह और क्यों लागु किया गया, इस  दिशा मे किस  तरह कार्यवाही हुई, और आगे सरकार की क्या योजना हो सकती है और क्या कमिया है । संजीवनी टुडे का विश्लेषण  कुछ इस तरह से है-  

SIT का गठन। 
नरेंद्र मोदी सरकार की पहली मीटिंग मैं सबसे पहले कालेधन की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड  जस्टिस जिगनेश शाह की अध्यक्षता मे ग्यारह सदस्यी  एसआईटी का गठन  किया  गया । इनके द्वारा बनाई गयी रिपोर्ट मे ये बताया गया की कालेधन के लिए  नगद का प्रयोग होता है। 

कालेधन के बड़े स्त्रोत। 


1. पूंजीगत लाभ -  लंबे  समय तक पैसा कंही निवेश करते है तो उसमे  अधिक समय तक निवेश करने से कर छूट मिलती है , इसका बहुत गलत प्रयोग इस तरह हो रहा है कि लोग यंहा निवेश करते है और काम कीमत पर शयेर खरीदते है और अधिक रिटर्न लेते है ,वो असल मे अधिक रिटर्न नहीं होती वो काली कमाई को सफ़ेद करने का तरीका होता है, सेबी ने ऐसे 250 कंपनियों पकड़ी है एक कंपनी मैं तो 5000 प्रतिशत तक रिटर्न मिला है। 

2. पीआर नोट्स - ये ऐसा नोट्स है जिनमे निवेश करने के लिए कोई जानकारी सेबी को नहीं देनी पड़ती पर हालांकी एफआईआई  ( भारत सरकार की संस्था जो इसे जारी करती है ) हर महीने सेबी को रिपोर्ट देती है परन्तु  इसके साथ सबसे बड़ी समस्या ये है की जिनके पास ये होंगे वो ही इस नोट के मालिक खुद अपनी इच्छा से बेच सकता है ,

केमैन टापू एक ऐसा देश है, जंहा की 55,000 जनसंख्या है वंहा पर ये  सबसे ज्यादा 85,000 करोड  निवेश हुआ, क्या ये संभव है ?

3. शैल कंपनिया - इनमे निवेश करने के लिए योजना होती है ,की खर्चे वढ़ा दो।   पनामा पेपर लीक भी सामने आई थी जिसमे कई भारतीयों के नाम सामने आये थे। 

4. क्रिकेट सट्टा- फिक्की की रिपोर्ट  के  अनुसार  हिंदुस्तान मैं 3,00,000  करोड रुपया का क्रिकेट मे सट्टा  लगता है अगर ये कानूनी हो तो 12,000   करोड कर के रूप मे प्राप्त हो सकते है। 

5. शिक्षा- डोनेशन के नाम पर करोडो लिए जाते है, और इसके  अलावा सारे निजी संस्था फीस कैश मे लेते है जिसका कर नहीं दिया जाता है। 

6. धार्मिक संस्थाओ मे चैरिटी इनसे कोई नहीं पूछा सकता और ये हमारे देश के भावनात्मक मुद्दे है इनका कुछ नहीं कर सकता। 

7. रियल स्टेट : सबसे बड़ी जगह जंहा कालाधन छुपाया जाता है ,एक तिहाई कला धन यंही है  छिपाया जाता है  यंहा भी समस्या नगद मै लेन-देन  के कारण है। 


स्विस बैंक से समझौता । 
सरकार ने स्विस बैंक से समझौता किया जिसमे उन्होंने लगभग 1100  भारतियों के नाम बताये जिनमे सरकार ने पहली लिस्ट जारी करते हुए  591 भारतियों के नाम  सुप्रीम कोर्ट को दिए  हैं।

जन-धन योजना। 
सभी  जगह जँहा कालाधन लगता है उसमे था एक चीज कॉमन थी नगद लेनदेन होना है,  नगद लेन- देन जिसका कोई रिकॉर्ड नहीं है और उसे रिकॉर्ड को लेन के लिए ही जरूरी था लोगो के पास नगद कितना है ये पता लगे और फिर आगे कालाधन दोबारा ना पनपे इसके लिए जरूरी था सारे लेन- देन नगद मे ना हो। 
  
इनकम डीक्लरेशन स्कीम । 
सरकार द्वारा  ये योजना लाई गयी जिसमे ये कहा गया की कालाधन रखने वाले अपनी आय का खुलासा 30 सितंबर 2016 तक कर सकते है जिसमे उन्हें 45 प्रतिशत कर देना होगा, जिससे  सरकार के पास 65000 करोड का कर आया। 
 
नोटबंदी। 
यही कारण रहा  सरकार ने पहले जन- धन योजना चलाई ताकी लोगो के पास लेन देन के लिए नगद आसानी से पंहुच सके फिर नोटबंदी की ताकी नगद का व्योरा मिले और उपलब्ध कला धन  उजागर  हो। 

कैशलैस अर्थव्यवस्था। 
सरकार कैशलेस समाज बनाने  के लिए नगद रखने  की निश्चित सीमा तय कर  सकती है।  इसके अलावा सरकार को तकनीक भी इसमें मददगार बना रही है  ताकी रोजमर्रा मे  भी लोगो को कैश की जरूरत ना पड़े। 

सरकार का अस्पष्ट रुख। 
सरकार पी नोट्स पर क्या कर रही है, इनमे जो पैसा लगा है ये स्पष्ट नहीं है, और जिस तरीके के आंकड़े दिखाते है, ये बहुत ही घातक है, इन पर तुरंत फैसला लिया जाना चाहिए। 

बेनामी सम्पति। 
जाहिर है, हमारे यंहा नेता और बड़े लोग बहुत ज्यादा बेनामी सम्पति रखते है, इन पर सरकार का रुख अस्पष्ट है, हालांकी ऐसे कयास लगाए जा रहे है की अगला एक्शन इसके ही  खिलाफ होगा परंतु इसके लिए सरकार का रुख क्लियर नहीं है । 

 

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