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वित्त मंत्रालय ने ‘भारत पर विदेशी ऋण' की रिपोर्ट जारी की
sanjeevnitoday.com | Saturday, September 16, 2017 | 03:15:26 PM
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नई दिल्ली। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा तैयार की गई‘भारत पर विदेशी ऋण: स्थिति रिपोर्ट 2016-17’ के वार्षिक प्रकाशन के 23वें अंक मेंमार्च 2017 के आखिर में भारत पर विदेशी ऋण की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 30 जून 2017 को जारीआंकड़ों और अन्य स्रोतों से प्राप्‍त आंकड़ों एवं सूचनाओं पर आधारित है। भारत परविदेशी ऋण के रुझान, संरचना और ऋण भुगतान का विश्लेषण करने के अलावा इसरिपोर्ट में अन्य देशों, विशेषकर विकासशील देशों के सापेक्ष भारत पर विदेशी ऋण कीएक तुलनात्मक तस्वीर पेश की गई है।

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रिपोर्ट की मुख्‍य बातें निम्‍नलिखित हैं:

मार्च 2017 के आखिर में भारत पर 471.9 अरब अमेरिकी डॉलर का विदेशी ऋण था, यह मार्च 2016 के आखिर में आंके गए विदेशी ऋण की तुलना में 13.1  अरब अमेरिकी डॉलर (2.7 फीसदी) कम है विदेशी ऋण में कमी दीर्घकालिक ऋणविशेषकर एनआरआई जमाराशि और वाणिज्यिक उधारियों में गिरावट की वजह सेसंभव हो पाई।

मार्च 2017 के आखिर में दीर्घकालिक विदेशी ऋण 383.9 अरब अमेरिकी डॉलरका था, जो कि मार्च 2016 के आखिर में आंके गए आंकड़े की तुलना में 4.4 फीसदीकी गिरावट को दर्शाता है मार्च 2017 के आखिर में कुल विदेशी ऋण का 81.4 प्रतिशत दीर्घकालिक विदेशी ऋण था, जो मार्च 2016 के अंत में 82.8  प्रतिशत था। मार्च 2017 के आखिर में अल्‍पकालिक विदेशी ऋण 5.5 प्रतिशत बढ़कर 88.0 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया यह मुख्य रूप से व्यापार संबंधी क्रेडिट (ऋण) में वृद्धिके कारण हुआ, जो 98.3 प्रतिशत हिस्‍सेदारी के साथ अल्पकालिक ऋण का एकप्रमुख घटक है।

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भारत पर विदेशी ऋण नियंत्रित दायरे में रहा है और वर्ष 2015-16 की तुलना में वर्ष 2016-17 में विदेशी ऋण की स्थिति में सुधार हुआ है, जैसा कि विदेशी मुद्राभंडार कवर एवं ऋण के अनुपात के 74.3 प्रतिशत से बढ़कर 78.4 प्रतिशत हो जानेऔर विदेशी ऋण जीडीपी अनुपात के 23.2 प्रतिशत से गिरकर 20.2 प्रतिशत पर आजाने से स्‍पष्‍ट होता है भारत पर विदेशी ऋण में दीर्घकालिक कर्जों की हिस्‍सेदारीज्‍यादा रही है। हाल के वर्षों में भारत पर विदेशी ऋण की स्थिति नीचे दी गई है। 

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