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भारत अपने सैनिक वापस बुलाये, सम्भव नहीं डोकलाम समझौता: चीन
sanjeevnitoday.com | Sunday, July 16, 2017 | 06:53:46 PM
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नई दिल्ली। सिक्किम के डोकलाम क्षेत्र में चीन के साथ चल रही तनातनी को खत्म करने के लिए विदेश मंत्रालय की ओर से डिप्लोमेटिक चैनल के इस्तेमाल की बात कहने पर चीन ने कहा है कि बॉर्डर लाइन ही बॉटम लाइन है और भारत को अपने सैनिक पीछे हटाना होगा।

चीन की प्रेस एजेंसी सिन्हुआ के एक लेख में कहा गया है कि चीन के लिए सीमा रेखा ही बॉटम लाइन थी। ऐसा पहली बार नहीं है कि चीन की सरकारी मीडिया ने इस वाक्य का प्रयोग किया है। लेख के मुताबिक, 'डोकलाम क्षेत्र से सेना वापस बुलाने की चीन की मांग को भारत लगातार अनसुना कर रहा है। हालांकि चीन की बात नहीं मानना महीनों से चल रहे इस गतिरोध को और बिगाड़ेगा ही और बाद में भारत के लिए शर्मिंदगी का विषय बन जाएगा।'

सिन्हुआ ने आगे लिखा है कि भारत को मौजूदा विवाद को 2013-14 के लद्दाख विवाद जैसा नहीं समझना चाहिए या फिर उससे तुलना भी नहीं करनी चाहिए। जो कि चीन, पाकिस्तान और भारत के बीच दक्षिणपूर्व कश्मीर में एक विवादित इलाका है। वहां कूटनीतिक कोशिशों की वजह से दोनों देशों के बीच सेना के टकराव से ही हल निकल गया था, लेकिन इस बार मामला पूरी तरह अलग है। इसलिए भारत को पीछे हटना होगा।

भारत और चीन की सेनाओं के बीच मौजूदा गतिरोध पिछले तीन दशकों का सबसे लंबा गतिरोध माना जा रहा है। 18 जून को शुरू हुए इस गतिरोध पर बीजिंग ने कहा था कि दिल्ली ने सीमा समझौते का उल्लंघन किया है। भारतीय सैनिक सीमा पार कर अवैध तरीके से डोकलाम इलाके में घुस आए और चीनी सैनिकों द्वारा बनाई जा रही सड़क के निर्माण को रोक दिया। भारत ने सड़क निर्माण की ओर इशारा करते हुए कहा है कि क्षेत्र में सीमा अभी तय नहीं है और चीन मौजूदा स्थिति को न बदले।

सिन्हुआ के मुताबिक, भारत ने पहली बार दोनों देशों के बीच सीमा समझौते का उल्लंघन किया है। कई बार विरोध प्रदर्शन जताने के बाद भी चीन को अपने प्रयासों में असफलता मिली है। भारत को यह पता होना चाहिए कि डोकलाम में उसका ठहराव अवैध है और इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी सेना वहां रूकी रहेगी। स्थिति के और खराब होने से पहले भारत को अपने फैसले पर विचार करना होगा।

लेख में भारत के विदेश सचिव एस. जयशंकर के बयान का भी जिक्र किया गया है। जिसमें जयशंकर ने कहा था कि भारत और चीन अपने मतभदों को विवाद नहीं बनाना चाहिए। चीन, भारत से इसी तरह की सकारात्मक कदमों अपेक्षा करता है।

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