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हाईकोर्ट :दही हांड़ी कैसे है साहसिक खेल हमे बताये?
sanjeevnitoday.com | Tuesday, July 18, 2017 | 08:32:32 AM
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मुंबई। मुंबई हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा है कि वह यह स्पष्ट करे कि दही हांडी एक साहसिक खेलकूद है। न्यायमूर्ति आर.एम. सावंत व न्यायमूर्ति साधना जाधव की खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि, क्या एक पांच वर्षीय बच्चे को एक अड्वेंचर खेल के हिस्से के रूप में मानव पिरामिड पर चढ़ने की इजाजत दी जा सकती है?

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गौरतलब है कि, यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी है, क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है। जिसमें दही हांडी पर बनने वाली मानव श्रृंखला की ऊंचाई अधिकतम 20 फीट रखने को कहा गया था। यह आदेश हाई कोर्ट ने 11 अगस्त, 2014 को दिया था।

बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने साल 2014 में दिए फैसले में कहा था कि मानव श्रृंखला की लंबाई 20 फीट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। साथ ही दही हांडी कार्यक्रम में नाबालिग बच्चे हिस्सा नहीं लेंगे। इसके बाद 11 अगस्त 2015 को महाराष्ट्र सरकार ने दही हांडी कार्यक्रम को साहसिक खेल घोषित कर दिया। खंडपीठ ने सरकार को 4 अगस्त तक इन सवालों का जवाब देने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता स्वाति पाटील की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई चल रही है।

वकील नितेश निवशे ने ऊंचे-ऊंचे मानव पिरामिड बनाए जाने की तस्वीरें पेश की। इस पर खंडपीठ ने कहा- तस्वीरे दिखाने की जरूत नहीं है हम जानते हैं कि हकीकत क्या है? वकील निवशे ने बताया-मुंबई भाजपा अध्यक्ष आशीष शेलार दही हांडी आयोजन समिति के अध्यक्ष थे फिर भी वे अदालत के आदेश का उल्लंघन कर आयोजित किए गए दहीहांडी उत्सव में मौजूद थे।

अब तक, दहीहंडी मुंबई में सबसे लोकप्रिय उत्सव है जहां हजारों सड़कों पर जाते हैं। लेकिन दुर्घटनाओं की बढ़ती हुई संख्या का हवाला देते हुए विशेष रूप से नाबालिगों को शामिल करते हुए, बॉम्बे हाईकोर्ट ने मानव पिरामिड की ऊंचाई 20 फीट तक सीमित कर दी थी। महाराष्ट्र सरकार ने आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कदम रखा था। सर्वोच्च न्यायालय ने भी 2016 में उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा है, इस अनुष्ठान में नाबालिगों को शामिल करना खतरनाक हैं।

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