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श्रीगंगानगर जिले में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई
sanjeevnitoday.com | Friday, September 15, 2017 | 12:34:07 AM
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श्रीगंगानगर। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई है। जिस तरह मरीज की गंभीर स्थिति होने पर उसे स्ट्रेचर ही अस्पताल लाया जा सकता है कमोबेश ऐसी ही स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की है। जिले का ऐसा कोई अस्पताल नहीं जिसमें स्टाफ पूरा हो। एक-आध जगह जहां स्टाफ पूरा है वहां जांच आदि के उपकरण नहीं, उपकरण है तो टेक्नीशियन नहीं। राजस्थान पत्रिका के संवाददाताओं ने अपने-अपने इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं की पड़ताल की तो चिंताजनक स्थिति सामने आई।


एक डॉक्टर के भरोसे सीएचसी
केसरीसिंहपुर. करोड़ों रुपए खर्च कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए आलीशान भवन तो बना दिया गया परन्तु सरकार पर्याप्त चिकित्सकों की व्यवस्था नहीं कर पाई। जिससे यह सीएचसी एकमात्र चिकित्सक के भरोसे ही संचालित हो रही है।
यह स्थिति विगत दो-तीन सालों से बनी हुई है। चिकित्सालय में डॉक्टरों के नहीं होने से अधिकांश मरीजों को श्रीगंगानगर के जिला अस्पताल में रेफर करना पड़ता है। 

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सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस सीएचसी में आपात स्थिति से निपटने की भी व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में केसरीसिंहपुर सहित कई गांवों के हजारों लोग यहा उपचार की आस में आते हैं लेकिन यहां सिर्फ एक डॉक्टर है उन्हें भी प्रतिनियुक्ति पर लगाया हुआ है। यहां नियुक्त तीन चिकित्सकों को दूसरी जगह प्रतिनियुक्ति पर लगा रखा है।

जीएनएम के भरोसे
मोरजंडखारी. यहां का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बिना चिकित्सक के संचालित हो रहा है। जांच की तो कल्पना करना ही बेमानी है। यह अस्पताल जीएनएम के बूते ही संचालित हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार स्टाफ का व्यवहार भी संतोषजनक नहीं है। मोरजंडखारी पीएचसी के अधीन दो सब सेंटर सरदारपुरा जीवन और ममडख़ेड़ा आते हैं। इन गांवों के लोगों चार-पांच किमी का सफर करके यहां आने पर भी पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिलती।

बंद पड़ा है लेबर रूम
मिर्जेवाला. सांसद आदर्श ग्राम पंचायत का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के रंगरोगन तो अच्छा है परन्तु इसमें लेबर रूम तक बंद है। आपरेशन थिएटर भी बंद है। पिछले दो माह से नसबंदी शिविर भी आयोजित नहीं हो रहा। यह भवन की समस्या के कारण ही है। दो साल से एनएम का पद खाली है। टीकाकरण के लिए पास के ही गांव से एएनएम को बुलाना पड़ता है।

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