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याकूब की फांसी के विरोध में थे गोपाल कृष्ण, फिर कांग्रेस ने क्यों बनाया VP उम्मीदवार: शिवसेना

Sanjeevni Today 17-07-2017 16:27:29

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति चुनाव में गोपाल कृष्ण गांधी को यूपीए उम्मीदवार बनाए जाने पर शिवसेना ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और गोपाल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने गोपाल कृष्ण गांधी को उम्मीदवार बनाकर संकीर्ण सोच दिखाई है। इससे पहले सोनिया गांधी ने चुनाव में संकीर्ण और सांप्रदायिक सोच के खिलाफ वोट करने की अपील की थी।  

 

शिवसेना स्पोक्सपर्सन संजय राउत ने अपोजिशन की मीटिंग में रविवार को दिए सोनिया गांधी के बयान पर कहा, ''किसकी सोच ओछी है? मैडमजी (सोनिया गांधी) गोपालकृष्ण गांधी ने 1993 मुंबई ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन की फांसी का विरोध किया था। उन्होंने याकूब को बचाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। ऐसे शख्स को उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाना आपकी कौन-सी मानसिकता दिखाता है। क्या इन्हें उपराष्ट्रपति बनाना चाहते हैं?

याकूब के बचाव में थे गांधी
आतंकी याकूब मेनन की फांसी रुकवाने के लिए गोपाल गांधी ने राष्ट्रपति को ख़त लिखकर यह गुजारिश की थी कि याक़ूब की फांसी की सज़ा रद्द की जाए. अपनी दलील में गोपालकृष्ण गांधी ने कहा था कि जब याकूब ने भारतीय व्यवस्था के सामने खुद को सुपुर्द किया और उससे कानून से सहयोग की बात भी सामने आई हो तब उसे फांसी दिए जाना ठीक नहीं। 

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कौन हैं गोपालकृष्ण गांधी?
71 साल के गोपाल कृष्ण गांधी का जन्म 22 अप्रैल 1946 को हुआ। उनके पिता देवदास बापू और कस्तूरबा गांधी के सबसे छोटे बेटे थे। मां का नाम लक्ष्मी था और वो फ्रीडम फाइटर तथा कांग्रेस के सीनियर लीडर सी. राजगोपालाचारी की बेटी थीं। गोपालकृष्ण 1968 में आईएएस बने। 2004 से 2009 के बीच वो वेस्ट बंगाल के गवर्नर रहे। ये वो दौर था जब 294 मेंबर्स वाली असेंबली में अकेले लेफ्ट के 235 विधायक थे। इसी दौरान बंगाल में सिंगूर और नंदीग्राम जैसे हिंसक आंदोलन हुए। 

2008 में जब सिंगूर हिंसा की आग में जल रहा था तब गोपालकृष्ण गांधी ही थे जिन्होंने बुद्धदेव भट्टाचार्य और ममता को बातचीत के लिए राजी किया। लेफ्ट की ताकत बंगाल में कम होती गई और ममता बनर्जी नई ताकत के तौर पर सामने आईं। गांधी सेंट स्टीफंस कॉलेज से निकले हैं। आईएएस बनने के बाद 80 के दशक तक वो तमिलनाडु में तैनात रहे। 1985 से 1987 तक वो वाइस प्रेसिडेंट के सेक्रेटरी रहे। अगले पांच साल तक वो प्रेसिडेंट के ज्वॉइंट सेक्रेटरी रहे। 1992 से 2003 तक वो कई डिप्लोमैटिक पोस्ट्स पर रहे। 1996 में साउथ अफ्रीका में इंडियन हाईकमिश्नर, 1997 से 2000 तक प्रेसिडेंट के सेक्रेटरी, 2000 में श्रीलंका में हाईकमिश्नर रहे। 2002 के बाद गांधी नॉर्वे और आयरलैंड में एम्बेसडर रहे।

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