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गैंगरेप के दौरान छात्रा की गई जान, रुला देगी हैवानियत
sanjeevnitoday.com | Saturday, July 15, 2017 | 02:49:53 PM
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शिमला। कोटखाई की छात्रा को लिफ्ट देकर पांच दरिंदों ने उसके साथ हैवानियत कर दी। मरने के बाद भी उसे नहीं छोड़ा। हैवानियत ऐसी कि आपकी रुह कांप जाएगी। उस दिन-हिमाचल पुलिस के सामने किए खुलासे में आरोपियों ने बताया कि वारदात के दिन आरोपी राजेंद्र सिंह अपनी गाड़ी में चार दोस्तों के साथ कहीं जा रहा था। इसी दौरान यह दसवीं की छात्रा रास्ते में मिल गई। यह राजेंद्र को जानती थी। गाड़ी रोकने पर छात्रा उसमें बैठ गई। मगर आगे जो हुआ वह रुह कंपा देने वाला था।

 

आरोपियों ने कबूला कि आगे जाकर उन्होंने जंगल में गाड़ी रोक दी। यहां सामान उतारने के बहाने  गाड़ी से उतर गए। एक दूसरे से बात की कि यही मौका है और ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा। वहीं, गाड़ी में बैठी छात्रा इन सबसे अंजान थी। ‌थोड़ी ही देर बाद युवक वापस गाड़ी के पास लौटे।

यहां छात्रा को बाहर उतरने को कहा। वह नहीं उतरी तो जबरदस्ती उसे बाहर घसीट लिया। इससे उसके कपड़े तक फट गए। कुछ पिन और कपड़े के टुकड़े भी वहां गिर गए। आरोपी उसका मुंह दबाए उसे जंगल में ले गए।

यहां कंटीली झा‌ड़ी में उसके कपड़े फाड़कर फेंक दिए। झाड़ियों के घाव तक छात्रा के पीठ पर लग गए। वह चिल्‍लाने की कोशिश करती मगर नशे में धुत्त दरिंदे नहीं माने। छात्रा के शरीर पर तीन जगह दांतों से काटने तक के निशान मिले हैं।

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1 comments

  • Kapoor dogra   17/07/2017

    गुड़िया गैंगरेप-हत्या केस, पुलिस ने सुनाई दरिंदगी की दास्तां aajtak.in [Edited by: राहुल सिंह] कोटखाई, 16 July 2017 हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित कोटखाई में रूह कंपा देने वाले गुड़िया गैंगरेप-मर्डर केस में डीजीपी सोमेश गोयल ने कुल 6 आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की है. मगर स्थानीय लोग पुलिस की बताई थ्योरी से संतुष्ट नहीं है. लिहाजा वह केस की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं. डीजीपी गोयल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि इस मामले में 19 साल से लेकर 42 साल तक के आरोपी शामिल रहे हैं. डीजीपी ने बताया, पुलिस ने सभी आरोपियों को शिमला के कोटखाई से गिरफ्तार कर लिया है. आरोपियों की पहचान कोटखाई निवासी आशीष चौहान (29), राजेंद्र सिंह उर्फ राजू (32), गढ़वाल निवासी सुभाष (42) और दीपक उर्फ दीपू (38), नेपाल निवासी सूरज (29) और लोकजन उर्फ छोटू (19) के रूप में की गई है. डीजीपी ने बताया कि पुलिस के पास आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं. आरोपियों ने अपना गुनाह भी कबूल कर लिया है. सभी आरोपियों से गुनाह की बारीकियों से जुड़ी परतें खोलने के लिए पूछताछ जारी है. एसआईटी ने काफी बेहतर तरीके से केस को सुलझाया है. मीडिया से बातचीत के दौरान उनके साथ एसआईटी चीफ जहूर जैदी भी मौजूद थे. क्या था मामला बीती 4 जुलाई को आरोपी राजेंद्र उर्फ राजू और अपने दोस्त आशीष और सुभाष के साथ स्प्रे करने वाली मशीन लेकर कहीं जा रहा था. इस दौरान उसने 10वीं में पढ़ने वाली छात्रा गुड़िया को देखा और गाड़ी रोककर उसे घर तक लिफ्ट देने की बात कही. गुड़िया इलाके में नई आई थी और बीते मई ही उसने स्कूल में दाखिला लिया था. गुड़िया राजू को जानती थी, लिहाजा वह उसके साथ गाड़ी में बैठ गई. दरअसल राजू अक्सर स्कूली बच्चों को ले जाता था, जिससे गुड़िया को भी उस पर शक नहीं हुआ. शराब के नशे में की हैवानियत पुलिस की मानें तो राजू और उसके दोस्त शराब के नशे में धुत थे. इसी दौरान उनकी नीयत बदली और उन्होंने बीच जंगल में सामान उतारने का बहाना बनाते हुए गाड़ी रोक दी. जिसके बाद उन्होंने मासूम के साथ गैंगरेप किया. आरोपियों ने अपने तीन साथियों को भी वहां बुला लिया और फिर गुड़िया की बेरहमी से हत्या कर उसकी लाश को जंगलों में फेंक दिया. गैंगरेप के दौरान दरिंदों ने मासूम गुड़िया के साथ हैवानियत की इंतेहा बरती थी. गुड़िया के शरीर पर मिले दांतों के निशान दरअसल गैंगरेप के दौरान उन्होंने गुड़िया को कंटीली झाड़ियों पर फेंक दिया था. गुड़िया की पीठ पर कांटों के कई निशान मिले हैं. गुड़िया के शरीर पर तीन जगह दांतों से काटने के निशान मिले हैं. सभी आरोपियों ने मासूम के साथ बारी-बारी से रेप किया था. इस दौरान उन्होंने गुड़िया का मुंह दबाए रखा, जिससे उसकी मौत हो गई. आशंका जताई जा रही है कि आरोपियों ने गुड़िया की मौत के बाद भी उसकी लाश के साथ रेप किया. इसके बाद वह लोग उसे वहीं नग्न हालत में फेंककर फरार हो गए. एसआईटी ने सुलझाया ब्लाइंड मर्डर केस एक आरोपी जो इस घटना के बारे में जानता तो था लेकिन इसमें शामिल नहीं था. उसके जरिए ही केस की जांच कर रही एसआईटी इस ब्लाइंड केस के सभी आरोपियों तक पहुंच सकी. मासूम गुड़िया से हुए गैंगरेप और हत्या मामले में भले ही पुलिस ने 6 आरोपियों को पकड़ लिए, मगर कुछ सवालों का जवाब अब भी पुलिस के पास नहीं है. जैसेः 1- जब 4 जुलाई को गुड़िया की हत्या कर दी गई थी, तो आखिर 6 जुलाई तक खूंखार जंगली-जानवरों वाले इस इलाके में उसकी लाश कैसे बची रही? 2- अगर दो दिन तक लाश वहां पड़ी थी तो उसके हाथ-पैर और पूरा शरीर बिल्कुल साफ-सुथरा कैसे बचा रहा? 3- शव के पास अगर उसके कपड़े पड़े थे तो वे बारिश होने के बावजूद वहीं पर सही सलामत कैसे थे? बारिश या तूफान का इन पर कोई असर नहीं पड़ा. कपड़े खराब तक नहीं हुए. 4- गैंगरेप के दौरान छटपटाहट की वजह से गुड़िया के हाथों और शरीर पर मिट्टी क्यों नहीं लगी? पुलिस को मौका-ए-वारदात से कोई निशान क्यों नहीं मिले? पहले खुद पुलिस भी घर या गाड़ी में गैंगरेप की बात कह रही थी. 5- आमतौर पर इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी भाग जाते हैं, लेकिन इस केस में आरोपी कहीं नहीं भागे. 6- जो दो नेपाली युवक पकड़े गए, उनके निवास से घटनास्थल की दूरी करीब 200 मीटर है. यह सवाल उठता है कि अगर उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया होता तो वह अपने घर के पास ही शव क्यों फेंकते? बहरहाल इन सभी सवालों की वजह से पुलिस पर सवालिया निशान उठ रहे हैं. सोशल मीडिया पर लोग केस की जांच सीबीआई से करवाने और गुड़िया के असली गुनाहगारों के लिए फांसी की मांग कर रहे हैं. साथ ही सोशल मीडिया के जरिए ही लोगों ने गुड़िया को इंसाफ दिलाने के लिए एक कैंपेन चलाया हुआ है. इस घटना ने समूचे हिमाचल प्रदेश में खलबली मचा दी है.

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