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जीएसआई के वैज्ञानिकों ने ढूंढा खजाना, 3 साल बाद मिली सफलता

Sanjeevni Today 17-07-2017 12:15:09

नई दिल्ली। जिऑलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि भारतीय प्रायद्वीपों के पानी में लाखों टन के कीमती खनिज और धातु है। पहली बार लगभग 2014 में मंगलुरु, चेन्नई, मन्नार बसीन, अंडमान और निकोबार द्वीप और लक्षद्वीप के आसपास समुद्री संसाधनों को पहचाना गया था।


वैज्ञानिकों के अनुसार, जिस मात्रा में वैज्ञानिकों के हाथ लाइम मड, फोसफेट-रिच और हाइड्रोकार्बन्स जैसी चीजें मिली हैं, उससे अंदाजा लगाया जा रहा है पानी के और भीतर वैज्ञानिकों को और बड़ी सफलता मिल सकती है। तीन साल बाद जिऑलजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) के वैज्ञानिकों ने 181,025 वर्ग किमी का हाई रेजॉल्यूशन सीबेड मोरफोलॉजिकल डेटा तैयार किया है और भारतीय इकोनॉमिक जॉन के भीतर 10 हजार मिलियन टन से भी ज्यादा लाइम मड होने की संभावना है।


वैज्ञानिकों ने सुनिश्चित किया है कि मंगलुरु और चेन्नई कोस्ट में बड़ी मात्रा में फास्फेट है। वहीं तमिलनाडु के मन्नार बेसीन कोस्ट में गैस हाइड्रैट है। साथ ही अंडमान सागर में मैगनिज और लक्षद्वीप के आसपास माइक्रो-मैगनिज नोड्यूल है।


तीन अत्याधुनिक अनुसंधान जहाज समुद्र रत्नाकर, समुद्र कौसतुभ और समुद्र सौदीकामा को इस मदद में लगाया गया है। जीएसआई के सुपरिंटेंडेंट जिऑलजिस्ट आशीष नाथ ने बताया कि इसका मुख्य मकसद मिनरलाइजेशन के संभावित इलाकों की पहचान करना और मरीन मिनरल सांसधनों का आकलन करना है।

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