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SC से पूछी केजरीवाल सरकार, संविधान या किस कानून में लिखा है कि दिल्‍ली भारत की राजधानी है?
sanjeevnitoday.com | Wednesday, November 15, 2017 | 01:04:43 PM
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नई दिल्‍ली। अक्सर ही विवादों में छायी रहने वाली अरविंद केजरीवाल सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने एक ऐसा अजीब प्रश्न रख दिया जिसको लेकर जज भी पहली बार में कुछ न कह सके। अरविंद केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा कि क्‍या संविधान या संसद से पारित किसी कानून के द्वारा दिल्‍ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया। 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र को लेकर बहस जारी थी और इस दौरान वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सिकरी, एएम खानवीलकर, डीवाय चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच के सामने कहा कि देश के संविधान या फिर किसी कानून में ऐसा कोई रिफरेंस नहीं है जो दिल्ली को देश की राजधानी बताता हो।

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जयसिंह ने कहा कि राजधानी किसी कानून से परिभाषीत नहीं हो सकती, कल केंद्र सरकार राजधानी को कहीं और ले जाने का फैसला भी कर सकती है। साथ ही संविधान यह भी नहीं कहता कि राजधानी दिल्ली होनी चाहिए।

जयसिंह ने आगे कहा कि हम जानते हैं कि अंग्रेज देश की राजधानी को कोलकाता से दिल्ली लेकर आए थे। हालांकि एक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अधिनियम है लेकिन इसमें भी दिल्ली को भारत की राजधानी नहीं बताता है।

इंदिरा जयसिंह के इस तर्क पर बेंच ने कोई टिप्पणी नहीं की। इंदिरा ने आगे कहा कि इस वक्त खंडपीठ के सामने बड़ा प्रश्न ये है कि क्या एक जगह के दो बॉस हो सकते हैं- दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार।

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उन्होंने आगे कहा, 'मैं ये दावा नहीं कर रही कि दिल्ली एक राज्य है क्योंकि इसके पास विधानसभा, मंत्रीपरिषद और मुख्यमंत्री हैं। लेकिन जैसे अन्य राज्यों में केंद्र और राज्य की शक्ति ‌का स्पष्टीकरण साफ-साफ और अलग-अलग होता है वैसा ही कुछ दिल्ली के लिए भी होना चाहिए।'

बता दें कि जब से दिल्ली में केजरीवाल सरकार बनी है तभी से राज्य सरकार और उपराज्यपाल के बीच अधिकारों की लड़ाई जारी है।

 

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