इस लड़के से मौत भी रहती है कोसो दूर, हैरान कर दिया सबको किन्नर भी करेंगे शादी इस जगह ... जाने जरा इस लड़की के शरीर में नही एक भी पसली, इसलिए हुआ ऐसा चल गया पता ! पहले मुर्गी आयी या अंडा ... आप भी जाने कौन आया पहले हाथियों के डर से इस गांव के लोग घर बनाकर रहते हैं पेड़ों पर Room No. 502 ! आज भी दिखती है वो मरी हुई लड़की इस रूम में नाराज पिता व भाई ने युवती को धारदार हथियार से काटा मज़बूरी में 7 करोड़ में बेचनी पड़ी वर्जिनिटी इस लड़की को इस नवजात बच्ची की जीभ थी सामान्य से बड़ी फिर किया ये ... 5 सितारा होटल में अमेरिकी पर्यटक से सामूहिक दुष्कर्म ट्राले-बाइक में टक्कर, महिला की मौत नहीं रहे पूर्व अंतरराष्ट्रीय हॉकी अंपायर फुलेल सिंह सुजलाना आज का राशिफल (3 दिसम्बर 2016) जल्द बॉलीवुड में इंट्री करेगे सुनील शेट्टी के बेटे अहान नोटबंदी से कालाधन आएगा, यह परियों की कहानी जैसा: महेश भट्ट ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री कैमरन ने आज मोदी से की मुलाकात 'जॉली LLB 2' का पोस्टर जारी, अक्षय का नजर आया सीधा साधा लुक..! कन्हैया कुमार ने मोदी को बताया ट्रंप से बेहतर टीवी एक्ट्रेस श्वेता तिवारी के घर गुंजी नन्ही किलकारी..! अमेरिकी रक्षा मंत्री कार्टर अपनी आखिरी विश्व यात्रा पर अगले हफ्ते आएंगे भारत
पति की मौत के बाद इस फौलादी महिला ने परंपराएं तोड़ निभाया फर्ज़
sanjeevnitoday.com | Tuesday, October 18, 2016 | 11:40:51 AM
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अलवर। विवाह के समय सात फेरे लेते हुए पति-पत्नी एक-दूसरे को वचन देते हैं कि आखिरी सांस तक हर सुख-दुःख को साथ में सहेंगे। हर दर्द में साथी को बराबर का हक़ देंगे। पति या पत्नी अपने पार्टनर के प्रति जीवन भर अपने सभी दायित्वों को पूरा करते हैं, लेकिन जब एक साथी बीच में ही सांसें छोड़ दे तो दूसरे को जो दर्द होता है, उसे कोई नहीं समझ सकता। 

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इतना गहरा सम्बन्ध होने के बावजूद समाज पत्नी या किसी भी स्त्री को ये हक़ नहीं देता कि वो अपने पति या किसी पुरुष की अर्थी को कन्धा दे सके, या उसकी चिता को आग दे सके लेकिन राजस्थान के अलवर में एक महिला अंजू यादव ने अपने पति की अचानक हुई मृत्यु के बाद बड़े ही धीरज का परिचय देते हुए उसकी अर्थी को अपने मजबूत कन्धों पर उठाया। 

पिछले सप्ताह गुजरात पुलिस में हेडकांस्टेबल के पद पर कार्यरत राकेश यादव की ड्यूटी के दौरान ही ह्रदय गति रुकने से मौत हो गई। वो गांव शिवदानसिंहपुरा के निवासी थे। अंतिम संस्कार के दौरान उनकी पत्नी अंजू ने तमाम सामाजिक ढकोसलों को दरकिनार करते हुए अर्थी को कंधा दिया और उनकी बड़ी पुत्री लोचन ने मुखाग्नि दी। पत्नी द्वारा अर्थी को कंधा देकर शमशान घाट तक ले जाने के दौरान मौजूद सभी लोगों की आंखों में भी आंसू छलक आए, मगर वे सब इस जीवनसंगिनी का हौसला देखकर दंग थे।

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