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तंबाकू उत्पादों पर उच्च टैक्स दर लगाने की अपील
sanjeevnitoday.com | Monday, October 17, 2016 | 05:20:42 PM
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जयपुर। वायॅस ऑफ टोबेको विक्टिमस, संबध हेल्थ फाउंडेशन,वालंटयरी हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया सहित कई संस्थाओं ने जीएसटी कौंसिल से तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत की उच्च टैक्स दर लगाने की अपील की है।

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इनमें उत्पादों में सिगरेट, बीड़ी और खैनी व गुटखा शामिल हैं।
जीएसटी जैसा व्यापक आर्थिक सुधार सरकार कार्यक्रम तंबाकू पर समान रूप से टैक्स लगाने का एक अनूठा मौका देता है और यह 40 प्रतिशत की सर्वोच्च जीएसटी दर हो सकती है । कार्यक्रम को अपनाने से लाखों भारतीयों को तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण असमय काल के गाल में जाने से बचाया जा सकता है।  कहा जााता है कि तंबाकू के उपयोग से हर साल कोई एक मिलियन लोगों की विभिन्न बीमारियों से मौत हो जाती है।

तंबाकू के कारण होने वाली बीमारियों की प्रत्यक्ष और परोक्ष लागत 2011 में 1.04 लाख करोड़ ($17 बिलियन) थी जो जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का 1.16 है। अकेले तंबाकू से संबद्ध प्रत्यक्ष चिकित्सीय लागत राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यय का करीब 21 है।  बेशक, तंबाकू के कारण होने वाला खर्च भारत सरकार व राज्य सरकारें तंबाकू पर उत्पाद शुल्क आदि से जो राजस्व प्राप्त करती हैं उससे ज्यादा है। (कुल स्वास्थ्य व्यय का सिर्फ 17 प्रतिशत है।)

वीएचएआई की सीईओ भावना मुखोपाध्याय के मुताबिक, जीएसटी लागू होने के बाद कायदे से ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक पदार्थों जैसे सिगरेट,बीड़ी आदि पर इतना टैक्स लगाया जाए कि वह बाधक के तौर पर काम करे। तंबाकू और तंबाकू उत्पादों के सभी अंतर खत्म करके जीएसटी के तहत सर्वोच्च दर पर टैक्स लिया जाना चाहिए क्योंकि टैक्स दर कम हुई तो उत्पाद सस्ते होंगे और इनका सेवन आसान होगा खासकर उन लोगों के लिए जो गरीबी, अशिक्षा और दूसरे कारणों से इसके अभ्यस्त हो जाते हैं।

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