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राम जन्मभूमि मामले में 7 साल बाद सुप्रीम कोर्ट में आज से सुनवाई

Sanjeevni Today 11-08-2017 08:37:46

नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई का आखिरकार सात साल बाद सुप्रीम कोर्ट में नंबर आ गया है। तीन जजों की विशेष पीठ अयोध्या मामले में लंबित अपीलों और अर्जियों पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 में आए फैसले के बाद, पिछले करीब 7 साल से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट के तीन जजों की पीठ ने 30 सितंबर, 2010 को दो-एक के बहुमत से फैसला सुनाते हुए विवादित स्थल को तीन बराबर हिस्सों में रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में बांटने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई, 2011 को अपीलें विचारार्थ स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी और सभी पक्षों को यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिए थे जो फिलहाल लागू हैं।


शुक्रवार दो बजे जस्टिस दीपक मिश्रा, अशोक भूषण व अब्दुल नजीर की पीठ  मामले की सुनवाई करेगी। पीठ के समक्ष कुल 21 याचिकाएं सुनवाई के लिए लगी हैं। जिसमें रामलला विराजमान की ओर से उनके "निकट मित्र" त्रिलोकी पांडेय मुकदमे की पैरवी करेंगे। हालांकि, हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ रामलला की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील देवकी नंदन अग्रवाल ने "निकट मित्र" की हैसियत से दाखिल की थी, लेकिन उनकी मृत्यु हो गई और अब उनकी जगह त्रिलोकी पांडेय पक्षकार बन गए हैं। 

दरअसल,मुख्य अपीलों के अतिरिक्त कई अर्जियां भी लंबित हैं, जिनमें कोर्ट से मामला निपटने तक अंतरिम आदेश मांगा गया है। उन्हीं में से एक अर्जी भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की है, जिसमें स्वामी ने पूजा अर्चना का हक और अपनी अर्जी पर स्वयं बहस करने की इजाजत मांगी है। 

बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के जफरयाब जिलानी ने शिया वक्फ बोर्ड को ज्यादा अहमियत देने से इनकार कर दिया। जिलानी ने कहा- ये सिर्फ अपील है और इस एफिडेविट का कानून में कोई महत्व नहीं है।

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