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भारत निर्मित चाबहार पोर्ट से चीन व पाकिस्तान के गठजोड़ को लगा करारा धक्का

Sanjeevni Today 04-12-2017 04:42:41

नई दिल्ली: वर्ष 1947 में आजादी और विभाजन के बाद से ही पूरे मध्य पूर्व, मध्य एशिया और यूरोप से भौगोलिक तौर पर अलग हुए भारत ने इस दूरी को पाटने के लिए संभवत: अभी तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल कर ली है। भारत की मदद से ईरान में तैयार चाबहार पोर्ट के पहले चरण का आज रविवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. हसन रोहानी ने उद्घाटन किया। इससे एक तो अफगानिस्तान समेत पश्चिम व मध्य एशिया के समूचे हिस्से तक भारत की सीधी पहुंच का ना सिर्फ रास्ता साफ हुआ है बल्कि चीन व पाकिस्तान के गठजोड़ को भी करारा धक्का लगा है जो इस पोर्ट से सिर्फ 72 किलोमीटर दूर ग्वादर पोर्ट तैयार करने में जुटे हैं।

भारत के लिए इसकी अहमियत उद्घाटन समारोह से 24 घंटे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ईरान यात्रा से लगाया जा सकता है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक रविवार के समारोह में जहाजरानी राज्य मंत्री पी राधाकृष्णन के साथ भारतीय दूतावास व अन्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। साथ ही भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच मंत्रिस्तरीय वार्ता भी हुई और चाबहार पोर्ट के विकास की आगे की रणनीति पर सहमति बनी। यह भी सहमति बनी है कि चाबहार पोर्ट को पूरी तरह से संचालित करने के लिए इससे संबंधित कानूनों को तीनों देश जल्द से जल्द पारित करेंगे। पोर्ट से जुड़े सड़क व रेल नेटवर्क का काम भी तेजी से शुरु किया जाएगा। साथ ही चाबहार पोर्ट के दूसरे चरण का काम और तेज किया जाएगा। माना जाता है कि भारत की तरफ से जल्द ही चाबहार पोर्ट के लिए चरण के लिए वित्तीय मदद का ऐलान करेगा।

पहले चरण के लिए भारत ने 50 करोड़ डॉलर की मदद दी है। भारत पहले ही ऐलान कर चुका है कि चाबहार पोर्ट पर दो बर्थ के निर्माण का काम दिसंबर, 2018 तक पूरा कर लिया जाएगा। चाबहार पोर्ट के पहले चरण का काम बेहद तेजी से पूरा होने से पाकिस्तान के साथ ही चीन को भी झटका लगना तय है। इस पोर्ट से सिर्फ 72 किलोमीटर की दूरी पर ग्वादर पोर्ट है जिसका पहला चरण डेढ़ वर्ष पहले चीन ने पूरा किया है। पाकिस्तान का मीडिया पहले से ही इस बात को लेकर शोर मचा रहा है कि चाबहार पोर्ट के जरिए भारत अफगानिस्तान और ईरान के साथ मिल कर उसे घेरने का काम कर रहा है। भारत ने इस पोर्ट के साथ एक विशेष आर्थिक क्षेत्र भी विकसित करना चाहता है। कुछ दिन पहले ही सड़क, राजमार्ग और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि भारत की योजना चाबहार पोर्ट में कुल दो लाख करोड़ रुपये निवेश करने की है।

इसके लिए भारत की कई निजी कंपनियों के साथ बात की जा रही है। भारत वहां एक एलएनजी टर्मिनल और एक यूरिया प्लांट भी लगाना चाहता है। भारत की भावी योजना में ईरान और रूस से प्राकृतिक गैस खरीद कर चाबहार स्थित एलएनजी टर्मिनल में इस्तेमाल करने की है। इस तरह से भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी यह बेहद अहम बन जाएगा। भारत की नजर इस पोर्ट के जरिए अपने उत्पादों के लिए मध्य एशियाई व यूरोपीय देशों के बाजार में जगह बनाने पर भी है। ईरान के राष्ट्रपति ने वैसे यह कहा है कि यह पोर्ट किसी दूसरे पोर्ट (ग्वादर) के साथ मुकाबला करने के लिए नहीं है लेकिन पूरी दुनिया के कूटनीतिक विशेषज्ञ यह समझ रहे हैं कि आने वाले दिनों में इन दोनो पोर्ट के बीच वाणिज्यिक तौर पर मुकाबला होना तय है। खास तौर पर ईरान के साथ तनाव होने के बावजूद अमेरिका ने ग्वादर पोर्ट को लेकर कोई खास विरोध नहीं किया है। उधर, जापान और भारत के बीच भी इस पोर्ट में भागीदारी होने के लिए बातचीत हो रही है।

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