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बैंक में जमा पैसे पर खत्म हो सकता है आपका हक, मोदी सरकार ला रही नया कानून

Sanjeevni Today 07-12-2017 01:27:00

नई दिल्ली। केंद्र सरकार एक ऐसा बिल लेकर आ रही है जो यदि पास हो गया तो आपके बैंक में जमा पैसे पर आपका हक खत्म हो सकता है ,बिल के मुताबिक, बैंक के दिवालिया होने की स्थिति में उस बैंक में जमा आपकी लाखों की रकम आप खुद ही नहीं निकाल सकेंगे। सरकार ने फाइनेंशियल रेजोल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस (एफआरडीआई) बिल -2017 का मसौदा तैयार है। इसे इसी शीत सत्र में संसद में रखा जा सकता है और अगर ये बिल पास हो गया तो बैंकिंग व्यवस्था के साथ-साथ आपके लिए कई चीजें बदल जाएंगी। 

बैंक की होगी आपकी गाढ़ी कमाई
सबसे बड़ा सवाल बैंकों में रखे आपके पैसे को लेकर है। यह बिल बैंक को अधिकार देता है कि, वह अपनी वित्तीय स्थ‍िति बिगड़ने की हालत में आपके जमा पैसे लौटाने से इनकार कर दे और इसके बदले आपको सिक्योरिटीज अथवा शेयर दें। 

क्या है एफआरडीआई बिल?
फाइनेंशियल रेजोल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (एफआरडीआई बिल) वित्तीय संस्थानों के दिवालिया होने की स्थिति से निपटने के लिए बनाया गया है। जब भी कोई बैंक अपना कारोबार करने में सक्षम नहीं होगा और वह अपने पास जमा आम लोगों के पैसे लौटा नहीं पाएगा, तो एफआरडीआई बिल बैंक को इस संकट से उभारने में मदद करेगा। 

आम आदमी के लिए इसलिए है चिंताजनक
इस प्रस्तावित कानून में 'बेल इन' का एक प्रस्ताव दिया गया है। अगर इस प्रस्ताव को मौजूदा मसौदे के हिसाब से लागू कर दिया जाता है, तो बैंक में रखे आपके पैसों पर आपसे ज्यादा बैंक का अधिकार हो जाएगा। 

क्या होता है बेल-इन?
बेल-इन का साधारण शब्दों में मतलब है कि, अपने नुकसान की भरपाई कर्जदारों और जमाकर्ताओं की जेब से करना। इस बिल में यह प्रस्ताव आने से बैंकों को भी यह अधिकार मिल जाएगा। 

बैंक में आपका पैसा, सुरक्षा इनके हाथों में
मौजूदा समय में बैंक में आपकी जो भी जमा पूंजी होती है। उसमें 1 लाख रुपये तक की राशि हमेशा सुरक्ष‍ित होती है। इसमें आपको मिलने वाला ब्याज भी शामिल होता है।  

सरकार ने क्या दी है सफाई
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह परिभाषित करने के लिए कहा है कि, जो फिलहाल तैयार मसौदे में नहीं है। उन्होंने कहा कि, अभी इसमें काफी बदलाव किए जा सकते हैं। इसको लेकर आम लोगों से सुझाव भी मांगे जाएंगे। 

इसे ऐसे समझिए
अगर किसी बैंक में आपने 5 लाख रुपये रखे हैं। किसी वजह से वह बैंक दिवालिया हो जाता है। वह जमाकर्ताओं के पैसे चुकाने की स्थ‍िति में नहीं रहता है, तो ऐसी स्थिति में भी उसे कम से कम 1 लाख रुपये आपको देने ही होंगे।  

अभी क्या है व्यवस्था?
मौजूदा समय में जो नियम-कानून हैं, उसके मुताबिक अगर कोई बैंक या वित्तीय संस्थान दिवालिया होता है तो जनता को एक लाख रुपए तक का बीमा कवर मिलता है। 1960 से ही इसके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अधीन ‘डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन’ काम कर रहा है।  

इसलिए है चिंता
बिल में ये बात तो कही गई है कि, बैंक में रखे आपके पैसे को सुरक्षा कवर मिलेगा, लेकिन ये साफ नहीं किया है कि यह कितनी रकम और किस स्थ‍िति में मिलेगा। 

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