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अस्वच्छ जीवनशैली के कारण बढ़ रही आर्थराइटिस रोगियों की संख्या
sanjeevnitoday.com | Friday, October 13, 2017 | 12:01:17 AM
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जयपुर। युवा भी आर्थराइटिस रोग से अछूते नहीं रहे हैं। देश के अन्य राज्यों की तुलना में राजस्थान में इसके मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। मुख्य वजह है फास्ट फूड, आराम-तलब जीवनशैली, मादक पदार्थों का सेवन, कंप्यूटर पर बैठकर घंटों काम करना और खाने में जरूरी पौष्टिक तत्वों की कमी होना। पहले यह बीमारी केवल उम्रदराज लोगों में होती थी, लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। एक अनुमान है कि 55 साल की उम्र के करीब 25% यानि 7 करोड़ से ज्यादा लोग इससे पीड़ित हैं। इनमें से करीब 7 लाख लोग इस रोग के प्रभाव से दैनिक क्रियाएं करने में अक्षम हैं। यह जानकारी निकल कर आई बुधवार को आर्थराइटिस पर आयोजित सेमिनार में। 

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सीनियर आर्थोपेडिक सर्जन एवं जीवनरेखा हॉस्पिटल के ज्वाइंट रिपलेस्मेंट सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. नीरज अग्रवाल बताया कि उम्र के साथ जोड़ों में होने वाली समस्या गठिया वाय, रींगन वाय, आस्टियो आर्थराइटिस के रूप में सामने आती है। ये रोगी रोग की चरम या गंभीरावस्था में डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। तब तक उनके जोड़ों में गंभीर विकृति पैदा हो चुकी होती है। ऐसे में पूर्ण घुटना प्रत्यारोपण का विकल्प ही शेष रहता है। 

महिलाओं में ज्यादा परेशानी 

शैल्बीहॉस्पिटल के जाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डाॅ. रणत रामजस विश्नोई ने बताया कि यह बीमारी महिलाओं में ज्यादा होती है। कारण है कि वह पौष्टिक खाने के प्रति लापरवाही बरतती हैं। ज्यादातर घर में ही रहने से उन्हें धूप भी कम मिलती है, जिससे शरीर में विटामिन-डी कम हो जाता है। मीनोपॉज के बाद हार्मोंस का असंतुलन भी इसका एक कारण है। 

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खतरनाकहो सकता है यह रोग 

आर्थराइटिसहड्डियों के घिसाव का ऐसा रोग है जिस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाए तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। जोड़ों में स्थायी विकलांगता भी सकती है। यही नहीं, फेफड़े, लिवर, आंखों जैसे अंगों को भी नुकसान हो सकता है। फिजियोथैरेपी या दवाइयों से भी लाभ नहीं मिलता है तो जोड़ प्रत्यारोपण भी कराना पड़ सकता है। यह कहना है नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसलटेंट, ज्वाइंट रिपलेस्मेंट सर्जन डाॅ. विजय वर्मा का। उन्होंने कहा इसके लिए नियमित व्यायाम जरूरी है। 

यहबरते सावधानी 

नियमितव्यायाम करें। दिनभर में किसी भी अवस्था में 10 हजार कदम यानि करीब 7 किलोमीटर चलना जरूरी है, वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है। घुटने में दर्द होने पर उकडू बैठने, तेज गति का खेल खेलने से परहेज रखना किया जाए। 

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