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आर्थ्राइटिस का बढ़ता मर्ज, जागरुकता ही बचाव...
sanjeevnitoday.com | Wednesday, October 11, 2017 | 04:39:50 PM
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नई दिल्ली। संधि शोथ यानि "जोड़ों में दर्द" ( Arthritis / आर्थ्राइटिस) के रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है। इस रोग में जोड़ों में गांठें बन जाती हैं और शूल चुभने जैसी पीड़ा होती है, इसलिए इस रोग को गठिया भी कहते हैं। संधिशोथ सौ से भी अधिक प्रकार के होते हैं। अस्थिसंधिशोथ (osteoarthritis) इनमें सबसे व्यापक है। अन्य प्रकार के संधिशोथ हैं - आमवातिक संधिशोथ या 'रुमेटी संधिशोथ' (rheumatoid arthritis), सोरियासिस संधिशोथ (psoriatic arthritis)।

संधिशोथ में रोगी को आक्रांत संधि में असह्य पीड़ा होती है, नाड़ी की गति तीव्र हो जाती है, ज्वर होता है, वेगानुसार संधिशूल में भी परिवर्तन होता रहता है। इसकी उग्रावस्था में रोगी एक ही आसन पर स्थित रहता है, स्थान परिवर्तन तथा आक्रांत भाग को छूने में भी बहुत कष्ट का अनुभव होता है। यदि सामयिक उपचार न हुआ, तो रोगी को भारी नुकसान पहुँच सकता है । संधिशोथ प्राय: उन व्यक्तियों में अधिक होता है जिनमें रोगरोधी क्षमता बहुत कम होती है। स्त्री और पुरुष दोनों को ही समान रूप से यह रोग आक्रांत करता है।   

नारायणा ह्रदयलया हॉस्पीटल जयपुर के वरिष्ठ ओर्थोपेडिक व जोड़ प्रत्यारोपण सर्जन डा० विजय शर्मा ने बताया कि यह रोग समय के साथ होने वाला सामान्य रोग है | कई बार यह युवाओ मे भी देखा जाता है जो नियमित रुप से व्यायाम न करने, एक्सपर्ट के बिना अधिक वजन उठाने व दैनिक लाइफ स्टाइल बदलने से देखा जाता हैं | डा० शर्मा ने बताया कि भारत मे इसके लगभग 7-8 करोड़ मरीज मौजुद है जो जानकारी के अभाव मे या बिना चिकित्सकीय इलाज के कारण रोग को बढ़ावा दे रहे है |

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आपके शरीर के जोड़ों में सूजन उत्पन होने पर गठिया होता है या आपके जोड़ो में उपास्थि (कोमल हड्डी ) भंग हो जाती है। शरीर के जोड़ ऐसे स्थल होते है जहाँ दो या दो से अधिक हड्डियां एक दूसरे से मिलती है जैसे की घुटने या कूल्हे उपास्थि जोड़ो  में गद्दे की तरह होती है जो दबाव  से उनकी रक्षा  करती है और क्रियाकलाप  को सहज बनाती है , जब किसी जोड़ में उपास्थि भंग हो जाती  है तो आपकी हड्डिया एक दूसरे के साथ रगड़ खाती है तो इससे दर्द , सूजन और ऐठन उत्पन्न होती है। हड्डी की गठिया में लम्बे समय से उपयोग  में लाए जाने अथवा व्यक्ति की उम्र बढ़ने  की स्थिति में  जोड़ घिस जाते  है हड्डी का गठिया अक्सर घुटनो , कूल्हों और हाथों में  होता है| फलस्वरूप समय समय पर जोड़ो के आस -पास के ऊतकों में तनाव होता है और दर्द बढ़ता है। 

लक्षण 
* जोड़ो में दर्द |
* जोड़ स्थिर नहीं रहते है या ऐसा महसूस होता है की यह सहारा नहीं देगा |
* जोड़ बड़े हो जाते  है या सूजन आ जाती है |
* अक्सर समय  के साथ अकड़न  जोड़ के आस पास गर्माहट|
* जोड़ के आस पास की त्वचा पर लालीपन  |

इलाज सम्भव है यदि -

* कारण की पहचान करे |
* जोड़ों में दर्द है पहचान करना |
* दर्द  की मात्रा |
* आपकी आयु |
* दैनिक गतिविधियों में प्रभाव |

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चिकित्स्कीय सुझाव:-
* दर्द और सूजन नियंत्रित करने के  लिए दवाएँ|
 * शारीरिक या पेशेवर थेरेपी |
* वजन कम करना |
* बाथटब या टॉयलेट के लिए सहायक उपाय जैसे की डंडा या पकड़ने वाली छड़ का उपयोग |
* पुराने  के लिए नया  जोड़ लगाने की लिए सर्जरी |
* क्रिया और जोड़ की शक्ति  में सुधार के  लिए  व्यायाम ,अच्छे विकल्पों में टहलना , तैरना , साईकिल चलाना, नृत्य करना शक्ति परीक्षण और  शरीर के हलके खिचाव वाले व्यायाम शामिल है |
* दर्द और सूजन पर नियंत्रण के लिए गर्म या ठन्डे पानी का  उपयोग |
* उन स्थितियों और गतिविधियों से बचना जिनसे आपके  उक्त जोड़ो पर अतिरिक्त जोर पड़ता हो जैसे : सीढिया चढ़ना , आलती-पालती  व उकडू बैठना |
* किसी एक स्थिति में अधिक लम्बे समय तक रहने से बचना |

तुरंत चिकितस्क से सम्पर्क  करे  यदि :-

*आपके जोड़ो में तेज़ दर्द हो |
* जोड़ में बहुत ज्यादा सूजन  हो |
* जोड़ वाले हिस्से को हिलाने में परेशानी हो |
* जोड़ के  आस पास की त्वचा लाल या गर्म महसूस हो|

लोगों को यह अनुभव भी हो सकते हैं:-

दर्द की जगह: जोड़, अंगुलियां, कलाई, गर्दन, टखना, पीठ, मांसपेशी, या हाथ,
दर्द के प्रकार: तेज़ या रुक-रुक कर,
दर्द होने का समय: बैठने पर,
मांसपेशी संबंधी: गतिविधि की सीमा कम होना, चलने में परेशानी, या मांसपेशियों में कमज़ोरी
जोड़: अकड़न, कोमलता, या सूजन,
पूरे शरीर में: थकान या स्वस्थ महसूस न करना ,
हाथ: उंगली पर गांठ या हाथ या पैरों की उंगलियों की हड्डी बढ़ना|
यह होना भी आम:-
गर्दन में अकड़न, लालपन, या शारीरिक खराबी|

 

 

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