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चिकित्सकों की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
sanjeevnitoday.com | Saturday, August 12, 2017 | 02:15:42 AM
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उत्तरकाशी। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल बदहाल है। जिला अस्पताल से लेकर सुदूरवर्ती गांवों तक के एलोपैथिक अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे हैं। चिकित्सकों की यह कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। खासकर महिला चिकित्सकों की स्थित तो जिले में सबसे बदहाल है।

पहाड़ पर डॉक्टर चढ़ने को तैयार नहीं हो रहे। सीमांत जिले में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को संजीवनी देने के लिए भेजे गए 10 चिकित्सकों में से चार चिकित्सकों ने अपनी पहुंच दिखते हुए अपना ट्रांसफर फिर से मैदानी क्षेत्रों में कर दिया है। जिले के चार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 8 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 7 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 20 स्टेट एलोपैथिक डिस्पेंसरी व 85 स्वास्थ्य उप केंद्रों का संचालन 38 चिकित्सकों के भरोसे चल रहा। 

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अधिकांश चिकित्सालय तो ऐसे हैं जहां चिकित्सक न होने के कारण अभी भी ताले लटके हुए हैं। जिले के तहसील व जिला मुख्यालय के अस्पतालों का हाल भी अच्छा नहीं है। जिला महिला अस्पताल में दो चिकित्सक तो हैं। लेकिन, इसमें एक ही चिकित्सक ऐसी है जो प्रसव पीड़िता की गंभीर स्थित में ऑपरेशन के जरिये प्रसव करा सकती है। वह चिकित्सक इन दिनों अवकाश पर है। 


इस कारण स्थिति और भी गंभीर बन गई है। ऐसी स्थिति में अगर कोई प्रसव पीड़िता गंभीर स्थिति में आ गई तो चिकित्सकों के पास उसे रेफर करने के अलावा कोई और उपाय नहीं है। महिला चिकित्सालय में शिशुओं को टीका करण के विभाग में भी केवल एक ही नर्स है। हर दिन अस्पताल में 8 बच्चों का जन्म होता है। साथ ही बुधवार के दिन टीकाकरण करने वालों भी भीड़ लगी रहती है। वहीं यमुना घाटी में गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए भटकना पड़ा रहा है।

सीएचसी नौगांव में मशीन तो हैं लेकिन रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। पुरोला में मशीन खराब पड़ी है। रेडियोलॉजिस्ट न होने से यमुना घाटी में तैनात डिप्टी सीएमओ को सप्ताह में दो दिन नौगांव में अल्ट्रासाउंड की सेवा देनी पड़ रहा है। सीएमओ डॉ. कल्पना गुप्ता ने बताया कि पहाड़ों में चिकित्सकों की कमी तो है। इस संबंध में निदेशालय को भी जानकारी है। इतने चिकित्सक और सुविधाएं हैं। उनके जरिये बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को देने का प्रयास किया जा रहा है।

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