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बदनसीबी के आगे हार गयी माँ की ममता, बच्चे तक को बेचना पड़ रहा
sanjeevnitoday.com | Tuesday, November 29, 2016 | 08:41:41 AM
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अलीगढ़। कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे दिन दिखाती है की दो वक्त की रोटी के लिए हमें सब कुछ बेचना पड़ जाता है। महफूज नगर में रहने वाली रिजवाना दो वक्त की रोटी के लिए इतनी बेबस है की वो अपनी कोख में पल रहे बच्चे तक को बेचने को मजबूर है। इसके बदले में उसे कुछ पैसे चाहिए ताकि वह अपनी बेटी और खुद का पेट भर सके। रिजवाना महफूज नगर में अपनी बहन रिहाना और बहनोई अख्तर हुसैन के साथ रहती हैं। 15 दिन पहले ही वह यहां पर आई है। जब मकान मालिक ने महज ढाई हजार रुपये का किराया नहीं चुकाने पर उसका सामान अपने कब्जे में लेकर घर से बाहर निकाल दिया था। 

कई गर्भवती महिलाएं नमक रोटी को तरस रही

बहन बहनोई भी रिजवाना को किसी तरह से दो वक्त की रोटी तो दे रहे हैं, लेकिन अब उसके गर्भस्थ शिशु का खर्च वहन करने में उन्होंने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। इसलिए मजबूरी में सबने तय किया कि रिजवाना के होने वाले बच्चे को किसी ऐसे परिवार को दिया जाए जो उसको पालन पोषण दे सके और रिजवाना की भी आर्थिक मदद कर सके। कोई ऐसा परिवार जो करीबी रिश्तेदार न हो ताकि बच्चा दूर रह कर बड़ा हो तो मां की ममता न जागे। सपा सरकार ने हौसला पोषण मिशन के  साथ कई योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाआें में मिलने वाला दूध घी सम्पन्न लोगों के घरों से बरामद हो रहा है इससे ठीक उलट रिजवाना जैसी कई गर्भवती महिलाएं नमक रोटी को तरस रही हैं।

 रिजवाना से पूछिए... !
रिजवाना को लड़की हो या लड़का। ऑपरेशन से हो या साधारण प्रसव। बच्चा लेने वाला जैसे चाहे वैसे कर ले। हम सभी के लिए तैयार हैं। रिजवाना को पैसों की जरूरत हैं नहीं तो अपना बच्चा कोई किसी को क्यों देगा..? हम सब बहुत मजबूरी में ये फैसला कर पाएं हैं। जब मकान मालिक ने उसका सामान रख लिया तो देहलीगेट थाने में शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।  ये प्रकरण बहुत दुखद है। रिजवाना को मातृत्व शिशु लाभ योजना में पंजीरी एवं अन्य पोषक तत्व दिलाए जाएंगे। महिला अस्पताल में डिलीवरी कराने पर उसे जच्चा-बच्चा की हर सुविधा और 1500 से दो हजार रुपये दिलाया जाएगा। समाजवादी पेंशन योजना में अनुदान दिलाएंगे। रोजगार दिलाने के साथ उसके पति को भी ढूंढेंगे। बच्चे को बेचने नहीं दिया जाएगा। 

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