BMC चुनाव: शिवसेना ने ली शुरूआती बढ़त, BJP दूसरे नंबर पर तुर्की में हटेगी महिला सैन्य अधिकारियों के हिजाब पहनने पर लगी ऐतिहासिक रोक Sanjeevni Today: Top Stories of 1pm इतिहास: ऐतिहासिक उपन्यासकार और निबंधकार थे वृंदावनलाल वर्मा! इस फिल्म में अंतरिक्ष यात्री का रोल निभाएंगे सुशांत सिंह यादव परिवार के बीच पैदा हुई कलह एक सोची-समझी साजिश थी: अमर सिंह डॉक्टर ने इलाज की बजाय गैंगरेप पीड़िता को बाहर फेंकने की दी धमकी! ATM से निकले 'चूरन लेबल' लिखे 2000 के फर्जी नोट, केजरीवाल ने PM मोदी पर किया हमला, कहा... चौथे चरण में भी कांग्रेस और सपा के प्रत्याशी आमने-सामने ट्रंप प्रशासन ने ट्रांसजेंडर शौचालय बनाये जाने के ओबामा के फैसले को पलटते हुए किया रद्द लाचार लड़की को अपनी आबरू बचाने के लिए जान से हाथ धोना पड़ा, जानिए घटना का क्रूर सच! भारत में पैनिक बटन वाला पहला LG K10 स्मार्टफोन हुआ लांच ऋतिक रोशन की मां ने दुनिया की सबसे वजनी महिला की मदद के लिए दी ये रकम हमें मुस्लिम प्रत्याशियों को भी देने चाहिए थे टिकट: राजनाथ Live INDvsAUS: ऑस्ट्रेलिया ने लंच तक 1 विकेट खोकर बनाए 84 रन नाइजीरिया: दो जर्मन पुरातत्वविद खुदाई के दौरान अगवा इस फिल्म के लिए सलमान ने घटाया 17 किलो वजन शोभा डे को एमपी के पुलिसकर्मी ने दिया करारा जवाब - दुबले होने का इलाज हो तो करवा दें 78 अंकों की बढ़त के साथ सेंसेक्स हुआ 28,942 दृष्टिबाधित विश्वकप जीतने वाली टीम के हर खिलाड़ी को 5-5 लाख देगी सरकार
बड़ी बात: नागरिकों के प्रति अधिक संवेदनशील
sanjeevnitoday.com | Friday, December 2, 2016 | 02:35:27 PM
1 of 1

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उचित ही अपनी सरकार के सभी मंत्रालयों से कहा है कि वे जनता की शिकायतों को एक महीने के भीतर निपटाएं। अगर ऐसा हो सके तो यह प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बहुत अहम कदम होगा। प्रशासनिक सुधार के उद्देश्य से समय-समय पर बने सभी आयोगों और समितियों की एक महत्वपूर्ण सिफारिश यही थी कि जन-शिकायतों का निपटारा एक समय-सीमा के भीतर होना चाहिए। पर यह अब तक सुनिश्चित नहीं किया जा सका है। जन-शिकायतों के समयबद्ध निपटारे का निर्देश प्रधानमंत्री ने पहली बार नहीं दिया है। दरअसल, इस मामले में पिछले साल मार्च में ही उन्होंने पहल कर दी थी, जब सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय की निगरानी में प्रगति प्रो-एक्टिव गवर्नेन्स एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन नाम से एक तंत्र गठित हुआ। इसका मकसद लोक शिकायतों का निवारण करने के साथ-साथ योजनाओं व कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर नजर रखना भी था। यों ये दोनों बातें एक हद तक आपस में जुड़ी हुई भी हैं, क्योंकि बहुत सारी शिकायतें योजनाओं तथा कार्यक्रमों के समय से या पारदर्शिता के साथ लागू न होने की वजह से होती हैं।

शिकायतों का एक बड़ा हिस्सा भेदभाव, उत्पीडऩ व अत्याचार से संबंधित होता है। जाहिर है, लोक शिकायतों का समयबद्ध निपटारा आर्थिक और सामाजिक न्याय का सबसे अहम तकाजा है। लेकिन हमारे देश में तमाम योजनाओं व कार्यक्रमों के साथ जो होता है वही प्रधानमंत्री की इस पहल यानी प्रगति के साथ भी हुआ। इसके पोर्टल पर आठ लाख से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं, जो कि पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। प्रगति की शुरुआत हुई, तो लोक शिकायतों के समाधान के लिए दो महीने का वक्त मुकर्रर किया गया था। अब प्रधानमंत्री ने प्रगति की समीक्षा करते हुए वैसी शिकायतों को एक महीने के भीतर निपटाने को कहा है। शायद लंबित शिकायतों की काफी बढ़ी हुई तादाद के मद्देनजर ही उन्होंने पहले के मुकाबले आधी अवधि तय की होगी। पर पिछले डेढ़ साल का अनुभव बताता है कि बहुत सारी जन-शिकायतों का समाधान उन्हें खारिज करके किया गया। इसलिए समय-सीमा के साथ यह भी जरूरी है कि शिकायतों का निपटारा न्यायसंगत हो। तभी प्रगति नाम से डेढ़ साल पहले हुई पहल की सफ लता मानी जाएगी और वह राज्य सरकारों के लिए भी मार्गदर्शन व प्रेरणा का काम करेगी।

प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होना ही अनावश्यक रूप से मुकदमे बढऩे का सबसे बड़ा कारण है। फिर अदालत की शरण में जाना व्यक्ति की मजबूरी हो जाती है। बहुत सारे मुकदमे जमीन के रिकार्ड दुरुस्त न होने की वजह से पैदा होते हैं। इसलिए प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को जमीन के रिकार्ड दुरुस्त करने को भी कहा है। उनके ताजा निर्देशों के पीछे एक वजह शायद यह भी रही हो कि कारोबारी सुगमता के मामले में देश की छवि में सुधार होने की जो उम्मीद की जा रही थी, वह पूरी नहीं हुई। आज भी दुनिया भर में भारत की छवि एक ऐसे देश की बनी हुई है जहां कारोबार करना आसान नहीं है। देश के भीतर भी बहुत सारे लघु और मझले उद्यमी ऐसा ही सोचते हैं। पिछले दिनों विश्व बैंक ने कारोबारी सुगमता 2017 सबके लिए समान अवसर शीर्षक सालाना रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट बताती है कि पिछली रिपोर्ट और ताजा रिपोर्ट के बीच के एक साल में भारत की स्थिति सिर्फ  एक पायदान सुधरी है, 190 देशों की सूची में वह 131 से 130 पर आया है। जाहिर है, प्रशासन को नागरिकों के प्रति अधिक संवेदनशील व अधिक जवाबदेह बनाना जनतांत्रिक पैमाने के साथ-साथ आर्थिक अवसरों में वृद्धि के लिहाज से भी जरूरी है।

यह भी पढ़े...बड़ी बात: न्याय के तकाजे में भाषा का पहलू

यह भी पढ़े...बड़ी बात: विपक्ष सड़क पर एकजुट नहीं



FROM AROUND THE WEB

0 comments

Most Read
Latest News
© 2015 sanjeevni today, Jaipur. All Rights Reserved.