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जज साहब "मैं जिन्दा हूँ, मेरे पति और सास निर्दोष है
sanjeevnitoday.com | Thursday, December 1, 2016 | 10:46:36 PM
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चित्रकूट। जज साहब "मैं जिन्दा हूँ, मुझे किसी ने नहीं मारा"! ये डायलॉग आपने सिर्फ फिल्मो में सुना होगा। लेकिन ये घटना हकीकत की है दरअसल राजापुर थाने के टिकरा गांव की निवासी ज्ञानवती (22) पत्नी उदित नारायण 5 अक्टूबर को ससुराल वालों से बिना बताए अपनी मर्जी से कहीं चली गई थी। 15 अक्टूबर को महिला के पिता मिलनवा ने राजापुर थाने में पति और चचेरी सास सुमित्रा के खिलाफ बेटी की हत्या करने का मुकदमा दर्ज कराया था। 

आपको पूरी जानकारी दे...
चित्रकूट जि‍ले के राजापुर थाना इलाके की ज्ञानवती की शादी 2015 में उदित नारायण से हुई थी।  ज्ञानवती 5 अक्टूबर 2016 को ससुराल में बिना बताए गायब हो गई थी। 18 अक्टूबर को कौशांबी जिले में यमुना नदी से एक महिला की लाश मिली। पुलिस ने पहचान के लिए ज्ञानवती के मायके वालों को बुलाया था। जिसको पिता मिलनवा ने अपनी बेटी का शव बताया था जिसके आधार पर आईपीसी की धारा-304 में दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। हत्या के आरोप में पति उदित नारायण और चचेरी सास सुमित्रा 40 दिनों से जेल में है। 

बुधवार को जब अदालत में केस की की सुनवाई चल रही थीं तो अचानक से ज्ञानवती आ गयी और कहा जज साहब में जिन्दा हूँ, मुझे किसी ने नहीं मारा, कृपया मेरे पति और सास सुमित्रा को छोड़ दीजिये। इससे जज सहित सभी हैरान रह गए और सैकड़ों की तादाद में वादकारी उस महिला को देखने लगे।

ज्ञानवती ने बताया...
घर में कुछ टेंशन की वजह से वह ससुराल छोड़कर अपनी रिश्तेदार के यहां चली गई थी। लेकिन जब उसने सुना कि उसकी हत्या के मामले पति को जेल भेज दिया गया है तो मुझे वापस आना पड़ा। जो महिला की लाश मिली, वह मेरी हमशक्ल होगी। इसी वजह से घर वालों को लगा कि लाश मेरी है और उन्होंने केस कर दिया।

इस घटना क्रम के बाद चित्रकूट सीजेएम सुभाष सिंह ने...
आनन-फानन सीओ राजापुर और वादी मिलनवा को तलब कर मुकदमे से आईपीसी की धारा-304 हटाने और वादी का सीआरपीसी की धारा-164 के तहत न्यायालय में बयान दर्ज कराने के अलावा निर्दोषों की रिहाई का फरमान सुनाया है। 

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