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पोक्सो अधिनियम के तहत बच्चों के चार अधिकार निर्धारित
sanjeevnitoday.com | Friday, August 11, 2017 | 03:38:05 PM
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नई दिल्ली। किशोर न्याय अधिनियम 2015 एवं पोक्सो अधिनियम 2012 पर समाहरणालय सभागार में गुरुवार को कार्यशाला हुई। मौके पर राज्य संसाधनसेवी सह प्रशिक्षक पीआर सेनगुप्ता ने दोनों अधिनियमों के बारे में पुलिस पदाधिकारियों को विस्तार से जानकारी दी। 


इससे पूर्व एसपी हरिलाल चौहान, एसी अनिल तिर्की, एसडीओ सौरव कुमार व एसडीपीओ अभिषेक कुमार ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर कार्यशाला का शुभारंभ किया। बच्चों के चार अधिकार निर्धारित: कार्यशाला में उपस्थित राज्य संसाधनसेवी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन (यूएनसीआरसी, 1989) में बच्चों के अधिकार निर्धारित किया गया। इसे भारत ने लगभग तीन साल बाद लागू किया। 

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बच्चों को चार अधिकार निर्धारित किया गया है। इनमें जीने का अधिकार, विकास का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार व सहभागिता का अधिकार शामिल है। उन्होंने बच्चों से जुड़े मामलों में पूरी सावधानी बरतने को कहा। उन्होंने कहा कि बच्चों को बाल मित्र कक्ष में ले जाकर आराम से पूछताछ करनी है। उन पर लगे आरोपों की जानकारी उन्हें देनी है। 


तीन श्रेणियों के अपराध: सेनगुप्ता ने बताया कि अपराध को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहला जिनमें तीन साल तक के सजा का प्रावधान हो सामान्य अपराध कहलाता है। तीन से सात साल की सजा गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। सात साल से अधिक की सजा को जघन्य अपराध कहा जाता है। उन्होंने पुलिस पदाधिकारी को किन बातों पर ध्यान रखना चाहिए उसके संदर्भ में भी विस्तार से बताया। कहा कि अपराध अगर नाबालिग बच्ची से हुआ है, तो पूछताछ के दौरान महिला बाल कल्याण पदाधिकारी की उपस्थिति अनिवार्य है। बच्चे को अपनी बात रखने का पूरा समय देना है। अगर बच्चा स्थानीय भाषा नहीं जानता तो उस भाषा को जाननेवाले की व्यवस्था करनी है। मौके पर बाल कल्याण विभाग के पदाधिकारी समेत सभी थानों के पुलिस अधिकारी, एसडीपीओ महागामा आरके मित्रा आदि उपस्थित थे।

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