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नशे की लत बच्चे सामान्य अपराध की नर्सरी हुए साबित
sanjeevnitoday.com | Sunday, July 16, 2017 | 07:48:09 AM
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ग्वालियर. एक औपचारिक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार नशे की लत में बच्चे सामान्य अपराध की नर्सरी साबित हो रहे हैं। किशोर अवस्था तक पहुंचते-पहुंचते ये बच्चे तकरीबन हर प्रकार के अपराध की जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। चूंकि पुलिस का रवैया हमेशा मनोवैज्ञानिक तौर पर गैर वैज्ञानिक ही रहता है। जिसके चलते बच्चों के दिमाग से पुलिस का भय भी समाप्त हो जाता है। ग्वालियर के स्लम और कांचमिल इलाके में गंभीर किस्म के सभी अपराध होता है। यहां बेहद छिटपुट अपराध में शामिल रहे बच्चों को धर लिया जाता है। अधिकारी बताते हैं कि इलाके में बड़ा क्राइम दर्ज होता है। विधि विरोधी गतिविधियों में संलग्र किशोरों को उठा लिया जाता है। हाल ही में घोसीपुरा के खुला आश्रयघर में नशे के आदी विधि विरोधी बच्चे रखे गए हैं। वहां उनकी काउंसलिंग की जा रही है।

बाल संरक्षण और उससे जुड़ी संस्थाओं के जिम्मेदार अफसरों के  बच्चों को अपराध मुक्त कराने की दिशा में जब भी अभियान की औपचारिकता पूरी करनी होती है, बार बार उन्हीं बच्चों को पकड़ लिया जाता है। ये चक्र साल दर साल चलता रहता है। जानकारी हो कि जिला स्तर पर विशेष किशोर पुलिस इकाई का गठन भी किया जाता है। इस इकाई का मकसद है। कि जिन विधि विरोधी बच्चों ने अभी बेहद असामाजिक काम किया है। उन्हें सामाजिक बनाना या सुधारना। उनका भविष्य रचनात्मक कार्यों में लगे।  इसमें बहुत कम सफलता हाथ लगी है। आधिकारिक जानकारी के इसका प्रभारी अफसर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रेंक का होना चाहिए। ग्वालियर में विशेष किशोर पुलिस इकाई अभी तक औपचारिक ही साबित हुई है। केवल निर्धारित अभियान की औपचारिकता ही इसके जरिए पूरी की जा रही है।

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