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हर साल लगभग ढाई लाख से ज्यादा होते है अपराध दर्ज
sanjeevnitoday.com | Thursday, September 14, 2017 | 10:48:48 AM
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नई दिल्ली। पुलिस की आवाम FIR दर्ज होने के बाद भी इस बात पर भरोसे नहीं किया जा सकता कि काम तुरंत शुरू हो जाएगा। इसके लिए अपने नंबर का इंतजार करना होगा, क्योंकि मध्यप्रदेश पुलिस के पास विवेचना के लिए करीब एक चौथाई पुलिसकर्मियों का टोटा है। वजह यह है कि पदोन्न्ति से भरे जाने वाले हवलदार, ASI, TI, DSP और ASP के पद रिक्त हैं। जिला पुलिस बल, CID, महिला अपराध और एससी-एसटी संबंधी अपराधों के विवेचकों के लिए अब टकराव के हालात बनने लगे हैं। 

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प्रदेश में हर साल लगभग ढाई लाख से ज्यादा अपराध दर्ज होते हैं। जिनमें से अनुसूचित जाति-जनजाति के मामलों की संख्या करीब 7000 हजार है। विशेषज्ञों के अनुसार जिला पुलिस बल के थानों में हवलदार और ASI करीब 90 फीसदी अपराध की विवेचना करते हैं। मगर इनकी ही संख्या दिनों -दिन कम होती जा रही है और सिपाहियों का प्रमोशन नहीं हो रहा। प्रदेश पुलिस में 3080 हवलदारों तो लगभग 2880 ASI की कमी हैं। 

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इन पदों पर सीधी भर्ती नहीं होती तो यह संख्या हर महीने बढ़ रही है, क्योंकि रिटायरमेंट भी लगातार हो रहे हैं। इसी तरह प्रदेश में स्वीकृत 1648 TI के पदों में से करीब सवा पांच सौ की कमी है। TI भी सीधी भर्ती का पद नहीं होता है। सीधी भर्ती के सिपाही, ASI और DSP के पदों पर भर्ती होती भी है, लेकिन सिपाही के प्रमोशन नहीं होने से वह हवलदार नहीं बन पा रहे। अदालत में प्रमोशन को लेकर चल रहे मामले से समस्या खड़ी हो गई है। मौजूदा बल में से लोग रिटायर भी हो रहे हैं। 

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