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संसद के शीतकालीन सत्र में पेश होगा ये नया कानून, बढ़ेंगी लोगों की मुश्किलें

Sanjeevni Today 06-12-2017 07:48:47

नई दिल्ली। नोटबंदी और जी.एस.टी. लागू करने के बाद मोदी सरकार बैंकिंग व्यवस्था में एक और कानून बनाने जा रही है, जिससे बैंक में बचत खाते में पैसा रखने वाले ग्राहक इस कानून के दायरे में रहेंगे और इस कानून के जरिये एक कभी न समाप्त होने वाली एक परमानेंट नोटबंदी’ का नया वित्तीय ढांचा खड़ा हो जाएगा। 

 

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केन्द्र सरकार फाइनैंशियल रैजोल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरैंस बिल (एफ.आर. डी.आई. बिल) 2017 को जोर-शोर से तैयार कर रही है। जिससे आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में पेश करेंगी है।


संसद के दोनों सदनों में पुख्ता बहुमत की वजह से आसानी से यह बिल पास होकर नया कानून बन जाएगा। इससे पहले इस बिल को केन्द्र सरकार ने मानसून सत्र के दौरान संसद में पेश किया था और तब इसे ज्वाइंट पार्लियामैंट्री कमेटी के पास सुझाव के लिए भेज दिया गया था।  
 
केन्द्र सरकार के नए एफ.आर.डी.आई. कानून से एक मौजूदा कानून डिपॉजिट इंश्योरैंस एंड क्रैडिट गारंटी कॉर्पोरेशन खत्म कर दिया जाएगा। मौजूदा समय में अलग-अलग बैंकों में जमा आपके पैसे की गारंटी इसी कानून से मिलती है। इस

कानून में एक जरूरी प्रावधान है कि किसी बैंक के बीमार होने की स्थिति में यदि उसे दिवालिया घोषित किया जाता है तो बैंक के ग्राहकों का एक लाख रुपए तक डिपॉजिट बैंक को वापस करना होगा। लिहाजा इसी कानून से देश की मौजूदा बैंकिंग व्यवस्था सबसे सुरक्षित और विश्वसनीय मानी जाती है।

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इस नए कानून से दोनों सरकारी और प्राइवेट बैंक, इंश्योरैंस कंपनियां और अन्य वित्तीय संस्थाओं में दिवालियापन की परेशानी से सामना करने के लिए एक नया ढांचा तैयार किया जाएगा।

केन्द्र सरकार का दावा है कि यह कानून देश में बैंकिंग और इन्सॉल्वैंसी कोड, सरकारी बैंकों के रीकैपिटलाइजेशन प्लान और इंश्योरैंस सैक्टर में विदेशी निवेश की मंजूरी के बाद फाइनैंशियल सैक्टर का एक लैंडमार्क रिफॉर्म होगा। 


अब बैंकों के एन.पी.ए. की समस्या तीव्र होने पर नया रैजोल्यूशन कार्पोरेशन यह तय करेगा, बैंक में ग्राहकों के डिपॉजिट किए गए पैसे में ग्राहक कितना पैसा निकाल सकता है और कितना पैसा बैंक को उसका एन.पी.ए. पाटने के लिए दिया जा सकता है। 


रेगुलेशन कॉरपोरेशन यह तय करेगी कि डिपॉजिट पैसे में से ग्राहक कितने पैसे निकाल सकता है। नए कानून आने के बाद केंद्र सरकार तय करेगी की संकट के समय ग्राहकों को कितने पैसे निकालने की छूट दी जाए। उनके बचत की कितनी  राशि से बैंकों के गंदे कर्ज को समाप्त करने का काम किया जाए।

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