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हर जमा के साथ करना पड़ सकता है 60% टैक्स का भुगतान
sanjeevnitoday.com | Thursday, December 1, 2016 | 12:27:04 PM
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मुंबई। अप्रैल से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों को अब तक बैंकों में जमा होने वाले छोटे कैश डिपॉजिट पर भी नोटिस जारी करने और उन पर 60 प्रतिशत टैक्स वसूल करने का अधिकार मिल सकता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स ऐक्ट में किए गए हालिया संशोधन में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कितने रुपये तक के कैश डिपॉजिट पर स्क्रूटनी हो सकती है। 

आयकर कानून में संशोधन में डिपॉजिट की लिमिट का जिक्र नहीं होना प्रधानमंत्री और रेवेन्यू सेक्रेटरी के उस वादे के खिलाफ है जिसके अनुसार 2.5 लाख रुपये तक के कैश डिपॉजिट की इनक्वायरी या इन्वेस्टिगेशन नहीं होगी। खेतान ऐंड कंपनी के टैक्स पार्टनर संजय सांघवी ने कहा की प्रस्तावित संशोधन को देखने से ऐसा लगता है कि जिन लोगों के घर में थोड़ा कैश रखा हुआ था।

अगर वह उसके सोर्स के बारे में नहीं बता पाते हैं तो उनको उनको उस पर 60 प्रतिशत टैक्स, सरचार्ज और पेनल्टी देनी पड़ सकती है। इस अहम मुद्दे पर सरकार की तरफ से क्लैरिफिकेशन आना जरूरी है। जिस डिपॉजिटर को नोटिस मिलेगा, उसे बताना होगा कि उनके पास वह कैश कहां से आया। साथ ही इसके कानून में बदलाव इसलिए किया गया है कि उस कैश डिपॉजिट पर ज्यादा टैक्स वसूल किया जा सके, जिसके सोर्स के बारे में डिपॉजिटर पक्के तौर कुछ बता ना पाए। 

खेतान ऐंड कंपनी की ईडी डी बक्शी को लगता है कि कालाधन सफेद करने के लिए जनधन योजना के दुरुपयोग होने संबंधी चिंताएं दूर करने के लिए कुछ दूसरे प्रावधानों पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा की जिन खातों में पिछले 12 महीनों से कोई ट्रांजैक्शन नहीं हुआ है, उनसे सिर्फ 25 प्रतिशत रकम निकालने की शर्त रखी जा सकती है। बाकी रकम स्कीम में ट्रांसफर कर दी जानी चाहिए।

जिन लोगों ने बंद हो चुके 500 और 1000 रुपये के करंसी नोटों में बैंक डिपॉजिट किया है, उनको सरकार ने काला धन से खुद को पाक साफ बताने का एक मौका दिया है। लखानी ने कहा की जिन लोगों के पास ब्लैक मनी है और अगर इसे चल और अचल संपत्तियों में लगाया गया है, तो उन्हें स्कीम का फायदा नहीं मिल पाएगा।

 अगर 25 प्रतिशत रकम जीरो को इंट्रेस्ट बॉन्ड में लॉक कर दिया जाता है तो इससे डिक्लेयरेंट की कॉस्ट 50 प्रतिशत से बढ़कर 56 पर्सेंट (टैक्स पेमेंट के बाद बॉन्ड पर 6 प्रतिशत यील्ड मानकर) हो जाएगी। लखानी ने कहा की 500 और 1000 रुपये के नोटों की शक्ल में जमा ब्लैक मनी चल और अचल संपत्ति में लगाए गए काला धन के मुकाबले बहुत कम है। इसको देखते हुए स्कीम कुछ लोगों को अट्रैक्टिव लग सकती है, लेकिन इससे काला धन बाहर निकालने का सरकार का असल मकसद पूरा नहीं हो पाएगा।

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