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जानिए, असली मावा पहचानने की Tips
sanjeevnitoday.com | Wednesday, October 19, 2016 | 09:05:16 AM
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नई दिल्ली। स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन द्वारा आज तक मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं गई है। सबसे ज्यादा मिलावट मावे की मिठाई में की जाती है।  दुकानों में अनुमान के अनुसार, दुर्गा पूजा से लेकर दीपावली तक 50 लाख रुपये से अधिक का कारोबार होता है, जिसमें से 60 से 65 फीसद मिठाईयों में मिलावट रहती है। बाजार में धड़ल्ले से मिलावटी मिठाईयां बेची जा रही हैं। मिठाईयों के गुणवत्ता की जाँच को स्वास्थ्य विभाग अपने दायरे में नहीं मानता है, और  दूसरी ओर फूड इंस्पेक्टर का कार्यालय ढूढने से नहीं मिलता है।  वहाँ न तो कार्यालय है और न ही फूड इंसपेक्टर ही है।

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जमुई जिले की किसी भी मिठाई दुकानों की जाँच करने फूड इंसपेक्टर आते हैं, तो किसी को पता नहीं चल पाता है। जाँच के लिए लैब नहीं रहने के कारण नमूने भी इकठ्ठे नहीं किए जाते हैं, और इसी  वजह से जमुई में मिलावटी मिठाईयों का कारोबार काफी फल-फूल रहा है।मिठाई खरीदते समय इन बातो का ध्यान देना चाहिए। मिठाई को हाथ में लेने पर रंग हाथों पर लग जाता है, तो समझ लेना वह मिठाई नकली है। मिठाइयों पर लगाए जाने वाला चादी का अर्क हाथ लगाने पर रंग छोड़ता है, तो वह भी नकली है। अगर मावे से बनी मिठाई को दोनों हाथों के बीच रगड़ने पर उसमें से चिकनाहट नहीं बाहर आती है, तो वह भी नकली मावे से बनी मिठाई है। इस तरह हम नकली मिठाई की पहचान कर सकते हैं।

चिकित्सा पदाधिकारी मनीष कुमार सिंह ने बताया कि मिठाई में अधिक चीनी की मात्रा रहने से डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। खराब मावा या अन्य रसायन युक्त मिठाई के सेवन से पेट से संबंधित गड़बड़ी हो सकती है। नकली मिठाई का सेवन नहीं करना चाहिए। खासकर बच्चों को इससे बचाने की आवश्यकता है। रोज लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है, दूसरी ओर जिम्मेवार लोग अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ने पर लगे हैं। 

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