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12 बड़े कर्जदारों के खिलाफ 1 महीने के अंदर करे मामला दर्ज

Sanjeevni Today 20-06-2017 08:40:37

नई दिल्ली।  आज यानि सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक ने उन खातों की पहचान की है जो बैंकों का 2 लाख करोड़ रुपए दबाए बैठे है। इन 12 कंपनियां पर 1 महीने के अंदर मामला दर्ज करें। राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्राइब्युनल ये देखेगा कि इन कंपनियों से पैसा वसूली का कोई रास्ता निकल सकता है या इन्हें बेचकर ही वसूली की जा सकती है। नीति आयोग मानता है कि सख्त कार्रवाई जरुरी है।

 

समिति के चेयरमैन टी हक के मुताबिक बैंकों को दोषी कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी है जिससे आगे के समय में करज़ न चुकाने वाला डरें। पिछले कई दिनों से बैंकों की एनपीए- यानी डूबेई पैसे- को लेकर देश भर में बहस चल रही है। बैंकों की कुल 8 लाख करोड़ रुपये कंपनियों के पास फंस गए हैं
इन कंपनियों के पास 500 कंपनियों का पता लगाया गया है, इनमें से 12 कंपनियां करीब दो लाख करोड़ हैं।

टी हक कहते हैं कि भारत सरकार के पास कोई राष्ट्रीय स्तर पर नीति है। एनपीए के खिलाफ कड़े कार्रवाई करने के लिए हक कहते हैं कि सरकार को नए नियमों को बनाने से, जिससे NPA की समस्या दोबारा खड़े हो और बैंकों से ऋण लेने के लिए नियम और सख्त बने रहें।

रिटेल बैंक ने जिन खातों की पहचान की है उनमें एमटेक ऑटो पर 14,074 करोड़ रुपये, भूटान स्टील पर 44,478 करोड़ रुपये, एस्सार स्टील पर 37,284 करोड़ रुपये, भूस पावर एंड स्टील पर 37,248 करोड़ रुपये, आलोक इंडस्ट्रीज पर 22,075 करोड़ रुपये, मॉनेट स्टील पर 12,115 करोड़ रुपये और लैंको इन्फ्रा पर 44,364.6 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। इस सूची में अन्य कंपनियों में इलेक्ट्रोस्टाइल स्टील्स पर 10,273.6 करोड़ रुपये, आईआरए इन्फ्रा पर 10,065.4 करोड़ रुपये, जेपी इन्फ्राटेक पर 9,635 करोड़ रुपये, एबीजी शिपयार्ड पर 6,953 करोड़ रुपये और ज्योति स्ट्रक्चर पर 5,165 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है।

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