loading...
loading...
loading...
भारत में क्रिकेट खेल साथ साथ धर्म भी प्रशासन की सख्ती के बावजूद फिर अवैध रूप से गर्भपात संकल्प कैंप में बच्चों को गुरुबाणी, गुरु इतिहास और रहित मर्यादा बारे जानकारी दी पेय पदार्थ के नाम पर दुकानदार परोस रहे है जहर भारत और विश्व के इतिहास में 27 जून की प्रमुख घटनाएं रेशा देवी ने कहा- युवाओं को नशे से दूर करने के लिए धर्म के साथ जोड़े दार्जिलिंग: भारी बारिश और बंद के माहौल में मुस्लिमो ने मनाया ईद-उल-फितर रमन शर्मा ने कहा- अापातकाल देश के इतिहास में काला दिन खाना खजाना प्रतियोगिता में महिलाओं ने दिखाया उत्साह कंडबाड़ी में NGO परिवर्तन द्वारा स्वास्थ्य शिविर का आयोजन बालड़ी रक्षक योजना ने तोडा दम स्वास्थ्य को लेकर महिलाओं का उदासीन रवैया इफ्तार पार्टी है नौटंकी, इसकी हमे क्या जरूरत: गिरिराज सिंह 2018 से बदल सकता है वित्त वर्ष, इस साल नवंबर में पेश हो सकता है बजट WWC 2017: ऑस्ट्रेलिया का विजयी आगाज, इंडीज को दी 8 विकेट से शिकस्त दिल्ली के नामी ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी के वेयर हाउस में 37 लाख रुपये की लूट 3 जुलाई को भोपाल में होगा ग्लोबल स्किल पार्क का शिलान्यास: चौहान मोदी के सपोर्ट में न्यूड होने वाली हॉट एक्ट्रेस ने थामा एनसीपी का दामन बैंक मैनेजर पिता 6 माह से कर रहा था अपनी बेटी के साथ ऐसा शर्मनाक काम ... भोपाल में पंचायती राज मंत्रियों का सम्मेलन 27 जून को होगा आयोजित
फैशन नही है ये ! टहनियों पर ब्लूटूथ से बात करते है यहाँ के जवान
sanjeevnitoday.com | Thursday, December 1, 2016 | 08:44:53 PM
1 of 1

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 80 किमी दूर धमतरी के बहीगांव सीआरपीएफ कैंप में मोबाइल नेटवर्क ठीक से नहीं आता। दरअसल, यहां नक्सल प्रभावित इलाके मेचका, सिहावा, खल्लारी व बोराई में बने बेस कैंपों के आसपास कोई मोबाइल टावर नहीं है। इस कारण इलाके में पोस्टेड सीआरपीएफ जवान मोबाइल होने के बावजूद घरवालों, दोस्तों और दुनिया से किसी भी तरह का कॉन्टैक्ट नहीं रख पाते।इस मुश्किल से निपटने के लिए जवानों ने कैंप के बाहर पेड़ों पर करीब 30-40 फीट ऊपर टहनियों में रस्सी बांध रखी है। जब उन्हें किसी से मोबाइल पर बात करनी होती है, तो वे पहले मोबाइल को मोजे में डालकर रस्सी से बांध देते हैं। फिर कॉल डायल कर रस्सी के दूसरे छोर को खींच लेते हैं। अब मोबाइल ऊपर चला जाता है। वह पेड़ के नीचे कान में ब्लूटूथ लगाकर घंटों खड़े रहते हैं। ऊंचाई पर जाने से सिग्नल आ जाता है और वे पत्नी-बच्चों से बात कर पाते हैं।

2009 से तैनात हैं यहां जवान
यहां के बिरनासिल्ली कैंप में तैनात जवान बताते हैं कि मोबाइल में नेटवर्क नहीं आने से वे परिवार वालों से हफ्तों बात नहीं कर पाते हैं। ऐसे में घरवालों की चिंता उन्हें हमेशा सताती रहती है। खासकर तब जब घर पर कोई खास मौका हो या किसी की तबीयत खराब हो। नक्सली हमलों की खबरें पढ़कर भी घरवाले हमेशा परेशान रहते हैं। ऐसे में यह जुगाड़ ही हम लोगों का सहारा है।  रिसगांव में 2009 में नक्सली हमला होने के बाद बिरनासिल्ली, मेचका और बोरई में कैंप बनाकर सीआरपीएफ जवानों को तैनात किया गया। नेटवर्क न होने से सर्चिंग के दौरान जवानों को एक-दूसरे और थानों से कॉन्टैक्ट करने में भी परेशानी होती है, हालांकि अब नेटवर्क समस्या को दूर करने के 22 स्थानों का सर्वे किया गया है।

 

यह भी पढ़े: ये है दुनिया के सबसे पेचीदा 21 तथ्य जिनका जानना बेहद जरुरी... पढ़े एक बार

यह भी पढ़े: नाक में क्यों होते है दो छेद? जाने वजह

यह भी पढ़े: जिंदगी भर के लिए छिन गयी इस लड़की की हंसी... पढ़ना ना भूले

यह भी पढ़े : ताज़ा और रोचक ख़बरों से जुड़े रहने के लिए डाउनलोड करें हमारा एंड्राइड न्यूज़ ऍप



FROM AROUND THE WEB

0 comments

© 2015 sanjeevni today, Jaipur. All Rights Reserved.