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पानी से बाहर निकालने पर भी नहीं मरती ये मछली!

Sanjeevni Today 20-06-2017 13:25:24

नई दिल्ली। 'मछली जल की रानी है, जीवन उसका है पानी है, हाथ लगाओ डर जाएंगी, बाहर निकालो मर जाएंगी', यह कविता बच्चा-बच्चा जानता है। कहने का मतलब यह है कि पानी के बिना मछली जीवित नहीं रह सकती है। मछली की एक ऐसी प्रजाति है जो पानी से बाहर निकालने पर भी नहीं मरती और लेकिन फूल जाती है। 

 

पफर फिश की त्वचा मजबूत और रूखी होती है। इनकी कुछ प्रजातियों में रीढ की हड्डी होती है। पेट इनके शरीर का सबसे लचीला हिस्सा होता है। जब पफर फिश मुंह से पानी खींचती है, तो इनके पेट का आकार सामान्य आकार से कई गुना फैल जाता है। इनमें चार नुकीले दांत होते हैं। ये दांतों का इस्तेमाल शंबुक यानी मसल, बडी CP यानी क्लैम और सीपदार मछली यानी शेलफिश पर हमले के लिए करती हैं। 

पफर फिश शैवाल और कई तरह के कृमि यानी वॉर्म्स के अलावा कडे खोल वाले जल जीवों को भी खाती हैं। ये बहुत साफ देख लेती हैं। 5 साल की उम्र होने पर ये प्रजनन की क्षमता प्राप्त कर लेती हैं। सहवास के लिए नर मादा को छिछले पानी यानी तटों के करीब जाने के लिए गाइड करते हैं जहां मादा तीन से सात अंडे देती हैं। 

बडी पफर अंडों की रक्षा करती हैं। साथ ही समय आने पर यही अंडों को फोडती हैं जिससे बच्चे बाहर निकल आते हैं। इसके बाद बडी पफर गहरे पानी में लौटकर अपने झुंड में शामिल हो जाती हैं। इनके छोटे बच्चों को मैग्नीफाइंग ग्लास के बगैर नहीं देखा जा सकता क्योंकि ये वयस्कों के शरीर से चिपके रहते हैं। अध्दुत पफर फिश खतरा महसूस होने पर ये अपने पेट को कुछ ही सेकेंड में फुलाकर बडा कर लेती हैं।

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