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इस गांव में बोली जाती है हमारी मातृभाषा, यहां चाहे हिन्दू हो या मुसलमान सब संस्कृत बोलते है।
sanjeevnitoday.com | Tuesday, November 29, 2016 | 06:12:35 AM
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नई दिल्ली। संस्कृत को देवों की भाषा कहा जाता है। इसके अलावा संस्कृत को भारतीय और यूरोपीय भाषाओं की जननी भी माना जाता है। संस्कृत भाषा का इतिहास बहुत पुराना है, लेकिन आज के बदलते दौर में संस्कृत बोलने वाले लोगों का अकाल सा पड़ गया है। लेकिन कर्नाटक स्थित मत्तूर गांव एक ऐसा गांव है। जहां आज भी संस्कृत बोली जाती है। इस गांव का हर एक व्यक्ति संस्कृत भाषा का उच्चारण करता है। चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान। इस गांव में संस्कृत भाषा प्राचीनकाल से बोली जाती है। इस गांव में न तो कोई रेस्तरां है न ही कोई गेस्ट हाउस लेकिन फिर भी संस्कृत भाषा बोले जाने के लिए यह बेहद प्रसिद्ध गांव माना जाता है। यह पूरी दुनिया में एक ही ऐसा गांव है जहां संस्कृत भाषा का उच्चारण बखूबी से किया जाता है। यहां पर रहने वाले लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में संस्कृत भाषा का इस्तेमाल करते हैं।

 20 दिन का एक कोर्स रखा जाता है यहां.. 
जिन लोगों को यहां संस्कृत बोलनी नहीं आती उनके लिए 20 दिन का एक कोर्स रखा जाता है। इन 20 दिनों में एक अच्छी संस्कृत भाषा का ज्ञान दिया जाता है। और वो भी मुफ्त में। इस गांव के कुछ लोग संस्कृत भाषी युवा आईटी इंजीनियर हैं। कुछ बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम करते हैं तो कुछ इंजीनियर। इस गांव की खासियत को अपनाने के लिए विदेशों से भी लोग इस गांव में आते हैं और यह माना जाता है कि यह दुनिया का संस्कृत बोले जाने वाला इकलौता गांव है । 3,500 जनसंख्या वाले इस गांव में संस्कृत भाषा का जन्म ऐसे ही नहीं हुआ बल्कि यह आंदोलन के तौर पर जन्मा एक इतिहास है। इस गांव में वाणिज्य विषय पढ़ाने वाले प्रोफेसर एमबी श्रीनिधि का कहना है कि पेजावर मठ के स्वामी ने इसे संस्कृत भाषी गांव बनाने का आह्वान किया, हम सबने संस्कृत में बातचीत करने का निर्णय लिया और एक नकारात्मक प्रचार को सकारात्मक मोड़ दे दिया। मात्रा 10 दिनों तक संस्कृत बोले जाने के लिए दो घंटे का अभ्यास किया जाने लगा और इस तरह से पूरा गांव संस्कृत में बातचीत करने लगा। लेकिन संस्कृत भाषा को इस तरह से महत्व देना सही में मायने में काबिले तरीफ है।

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