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फैशन नही है ये ! टहनियों पर ब्लूटूथ से बात करते है यहाँ के जवान

संजीवनी टुडे 01-12-2016 20:44:53

This is not fashion Talk to the young branches Bluetooth

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 80 किमी दूर धमतरी के बहीगांव सीआरपीएफ कैंप में मोबाइल नेटवर्क ठीक से नहीं आता। दरअसल, यहां नक्सल प्रभावित इलाके मेचका, सिहावा, खल्लारी व बोराई में बने बेस कैंपों के आसपास कोई मोबाइल टावर नहीं है। इस कारण इलाके में पोस्टेड सीआरपीएफ जवान मोबाइल होने के बावजूद घरवालों, दोस्तों और दुनिया से किसी भी तरह का कॉन्टैक्ट नहीं रख पाते।इस मुश्किल से निपटने के लिए जवानों ने कैंप के बाहर पेड़ों पर करीब 30-40 फीट ऊपर टहनियों में रस्सी बांध रखी है। जब उन्हें किसी से मोबाइल पर बात करनी होती है, तो वे पहले मोबाइल को मोजे में डालकर रस्सी से बांध देते हैं। फिर कॉल डायल कर रस्सी के दूसरे छोर को खींच लेते हैं। अब मोबाइल ऊपर चला जाता है। वह पेड़ के नीचे कान में ब्लूटूथ लगाकर घंटों खड़े रहते हैं। ऊंचाई पर जाने से सिग्नल आ जाता है और वे पत्नी-बच्चों से बात कर पाते हैं।

2009 से तैनात हैं यहां जवान
यहां के बिरनासिल्ली कैंप में तैनात जवान बताते हैं कि मोबाइल में नेटवर्क नहीं आने से वे परिवार वालों से हफ्तों बात नहीं कर पाते हैं। ऐसे में घरवालों की चिंता उन्हें हमेशा सताती रहती है। खासकर तब जब घर पर कोई खास मौका हो या किसी की तबीयत खराब हो। नक्सली हमलों की खबरें पढ़कर भी घरवाले हमेशा परेशान रहते हैं। ऐसे में यह जुगाड़ ही हम लोगों का सहारा है।  रिसगांव में 2009 में नक्सली हमला होने के बाद बिरनासिल्ली, मेचका और बोरई में कैंप बनाकर सीआरपीएफ जवानों को तैनात किया गया। नेटवर्क न होने से सर्चिंग के दौरान जवानों को एक-दूसरे और थानों से कॉन्टैक्ट करने में भी परेशानी होती है, हालांकि अब नेटवर्क समस्या को दूर करने के 22 स्थानों का सर्वे किया गया है।

 

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