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इस शहर में बीते 10 सालों से नहीं चल रहा कोई 'नोट' और ना ही बैंक ATM
sanjeevnitoday.com | Tuesday, November 29, 2016 | 02:12:58 PM
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ऑरोविले/अकोदरा। भारत का एक ऐसा शहर जहां 10 साल से कई लोगों ने नोट की शक्ल तक नहीं देखी... एक ऐसा गांव जहां 10 रुपए की चाय से लेकर सिगरेट तक सभी का पेमेंट मोबाइल से होता है। इन दोनों ही जगह नोटबंदी के फैसले के बाद से लोगों में ना तो 500-1000 के नोट बदलवाने की टेंशन दिखी और ना डेली खर्चों पर कोई फर्क पड़ा। 

फिर चाहे चेन्नई से 150 किमी दूर मौजूद ऑरोविले शहर की बात करें या अहमदाबाद से 85 किमी दूर अकोदरा गांव की। इसकी वजह यहां की कैशलेस इकोनॉमी है। बता दें, ऑरोविले में तो नोटों का चलन तब से बंद है जब भारत में 500 रुपए के नोट छपने भी शुरु नहीं हुए थे। वहीं, अकोदरा में सबसे कम पढ़ा-लिखा इंसान भी आज मोबाइल से पेमेंट करता है। बता दें, देश में पहली बार 500 रुपए का नोट 1987 में आया था। 

कैसे होता है यहां कैशलेस ट्रांजैक्शन
1. 1968 में बने ऑरोविले इंटरनेशनल टाउन में 1985-86 में एक फाइनेंशियल सर्विस सेंटर स्टार्ट किया गया।
2. तब से ये RBI की परमिशन लेकर बैंक की तरह ही काम करता है। इसमें यहां रहने वाले लोग अपना पैसा ऑनलाइन या ऑफलाइन जमा कराते हैं।
3. इसके बदले ऑरोविले फाइनेंशियल सर्विस (AFS) एक अकाउंट नंबर देता है। 
4. AFS के इंचार्ज रत्नम के मुताबिक, ऑरोविले के करीब 200 कमर्शियल सेंटर और छोटी-बड़ी दुकानों पर इसी अकाउंट नंबर को बता के खरीददारी की जाती है।
5. वहीं, यहां आने वाले गेस्ट और वॉलिन्टियर के लिए डेबिट कार्ड की तरह एक ऑरो कार्ड जारी किया जाता है।
6. रत्नम का कहना है कि कुल मिलाकर ऑरोविले की सीमा के अंदर की दुकानों पर तो कैश से पेमेंट का कोई सिस्टम नहीं है लेकिन शहर के बाहर से जरूरी सामान मंगाने के लिए ऑनलाइन सुविधा ना होने पर कभी-कभी कैश पेमेंट करना पड़ता है। जरूरत पड़ने पर कुछ टूरिस्टों को भी इमोशनल ग्राउंड पर छूट दे दी जाती है। बता दें, ऑरोविले टाउन तमिलनाडु के विलुप्पुरम जिले में है। चेन्नई से इसकी दूरी 150 किमी और पुड्डुचेरी से 10 किमी है।

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