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नेपाल सरकार ने संसद में पेश किया संविधान संशोधन विधेयक

Sanjeevni Today 01-12-2016 09:11:39

काठमांडू। नेपाल सरकार ने संसद में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया है। इसके माध्यम से आंदोलनरत मधेसियों और दूसरे समूहों की मांगों को पूरा करने का प्रयास किया गया है। संविधान संशोधन विधेयक को मंगलवार को संसद सचिवालय में पंजीकृत किया गया। इसके पहले दोपहर बाद प्रधानमंत्री के सरकारी आवास बालूवाटर में कैबिनेट की बैठक में मसौदे को पारित किया गया। इसमें मधेसी पार्टियों की प्रमुख मांगों ऊपरी सदन में प्रतिनिधित्व, प्रांतीय सीमाओं का दोबारा निर्धारण, विभिन्न भाषाओं को मान्यता देने और नागरिकता का मुद्दा प्रस्तावित है।


इन मांगों को लेकर मधेसी पार्टियों के समूह फेडरल अलायंस ने सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया था। इसके एक दिन बाद कैबिनेट की बैठक हुई। इस अलायंस ने हाशिये पर कर दिए गए लोगों के लिए ज्यादा अधिकार और प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांगों को लेकर आंदोलन छेड़ रखा है। इन्हीं मुद्दों को लेकर पिछले साल सितंबर से लेकर इस फरवरी तक बड़े पैमाने पर आंदोलन हुआ था। इसमें 50 लोग मारे गए और देश में भारत से आपूर्ति बाधित हो गई थी। 


प्रस्तावित विधेयक में सरकार ने नवलपरासी, रुपनदेही, कपिलवस्तु, बांके, डांग और बर्दिया को दूसरे तराई प्रांत में शामिल किया है। इसे प्रांत 5 के तौर पर जाना जाएगा। उप प्रधानमंत्री और गृहमंत्री बिमलेंद्र निधि ने बताया कि सरकार ने सीमाओं से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए आयोग बनाने का फैसला भी किया है।


विपक्ष ने किया विरोध

मुख्य विपक्षी पार्टी सीपीएन-यूएमएल के उपाध्यक्ष भीम रावन ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक देश के हित में नहीं है। इससे समाज का ध्रुवीकरण और विभिन्न राजनीतिक समूहों में संघर्ष बढ़ेगा।

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