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आतंकवाद पर होगी हॉर्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में PAK की घेराबंदी

Sanjeevni Today 01-12-2016 09:28:20

नई दिल्ली। पंजाब के अमृतसर में होने वाले ‘हॉर्ट ऑफ एशिया’ सम्मेलन में भारत और अफगानिस्तान आतंकवाद पर पाकिस्तान को असरदार ढंग से घेरने का प्रयास करेंगे वहीं ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना में रूस और पश्चिम एवं मध्य एशियाई देशों को शामिल करने के बारे में भी बात करेंगे।  अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण को लेकर इस्तांबुल प्रक्रिया के तहत स्थापित हॉर्ट ऑफ एशिया सम्मेलन के छठवें सत्र की थीम सुरक्षा एवं समृद्धि है।

पीएम मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति करेंगे उद्घाटन


यह सम्मेलन तीन और चार दिसम्बर को अमृतसर में आयोजित किया जाएगा जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी संयुक्त रूप से करेंगे। मंत्रीस्तरीय बैठक में अफगानिस्तान की ओर से वहां के विदेश मंत्री हिकमत खलील करजई शामिल होंगे।


सम्मेलन में सरताज अजीज भी होंगे शामिल


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज भी इस सम्मेलन में भाग लेंगे। सम्मेलन के विवरण को साझा करने के लिए आज यहां विदेश मंत्रालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में भारत में अफगानिस्तान के राजदूत शाइदा मोहम्मद अब्दाली ने कहा कि न केवल अफगानिस्तान और भारत बल्कि इस पूरे क्षेत्र की समृद्धि के रास्ते की सबसे बड़ी चुनौती आतंकवाद है। 

सम्मेलन में उठाया जाएगा अतंकवाद का मुद्दा


आगामी सम्मेलन में आतंकवाद निरोधक क्षेत्रीय फ्रेमवर्क  को मंजूरी दिलाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि पिछले साल इस्लामाबाद में हुए पांचवें सम्मेलन में यह फ्रेमवर्क बनाने पर सहमति बनी थी। काफी मशक्कत के बाद तैयार इसके मसौदे को विभिन्न सदस्य देशों को विचार के लिए भेजा गया था और पूरी उम्मीद है कि इस सम्मेलन में इसे मंजूरी मिल जाएगी।


भारत और अफगानिस्तान दोनों ही हैं आतंकवाद से पीड़ित


यह पूछे जाने पर कि भारत और अफगानिस्तान दोनों ही देश सीमापार आतंकवाद से बुरी तरह से पीड़ित हैं और सबको पता है कि आतंकवाद कहां से आता है। वैसे भी दक्षेस आतंकवाद निरोधक फ्रेमवर्क और अन्य ढांचे भी पहले से अस्तित्व में हैं जिनसे आतंकवाद के स्रोत पर कोई लगाम नहीं लग पायी तो ऐसे में इस फ्रेमवर्क से पाकिस्तान पर बाध्यकारी दबाव कैसे बनाया जा सकेगा। अब्दाली ने कहा कि असल सवाल दरअसल यही है। फ्रेमवर्क के मसौदे पर आखिरी दौर की बातचीत जारी है। हमें उम्मीद है कि इस फ्रेमवर्क से प्रभावी ढंग से आतंकवाद के स्रोत पर लगाम लग सके। 

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